आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । प्राकृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक विविधताओं से समृद्ध सोनभद्र को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की मांग एक बार फिर उठी है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट की ओर से नगर स्थित कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने जिले की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने के लिए ठोस पहल किए जाने की जरूरत बताई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक रवि प्रकाश चौबे ने की। उन्होंने कहा कि सोनभद्र लगभग 130 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले भूतात्विक, पुरातात्विक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पौराणिक स्थलों की विविधता समेटे हुए है। ऐसी विविधता वाले जिले की पर्यटन क्षमता को व्यापक स्तर पर विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सोनभद्र-मिर्जापुर क्षेत्र में गुफा और भित्तिचित्रों की खोज का इतिहास काफी पुराना है। उनके अनुसार, वर्ष 1867-68 की शरद ऋतु में पुरातात्विक खोजकर्ता आर्किबाल्ड कार्नेलिस द्वारा सोहागीघाट क्षेत्र में गुफा चित्रों की खोज की गई थी। इसके बाद जे0 कॉकबर्न समेत अन्य पुरातात्विक खोजकर्ताओं ने क्षेत्र में शोध एवं खोज का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जिले में पुरातात्विक खोज की प्रक्रिया आज भी जारी है।
पर्यटन विकास से खुल सकते हैं रोजगार के रास्ते –
मुख्य अतिथि इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि सोनभद्र में अनेक धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद होने के बावजूद अभी तक किसी एक प्रमुख स्थल का व्यापक पर्यटन विकास नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा मिलने से देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, भारतीय संस्कृति की पहचान मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा अर्जित होने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
यूथ आइकॉन उत्तर प्रदेश सौरभ कांतपति तिवारी ने कहा कि सोनभद्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जिले की अर्थव्यवस्था को केवल खनन गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- पर्यटन स्थलों को सड़क से जोड़ने पर जोर –
प्रकृति प्रेमी राजू चौबे ने कहा कि सोनभद्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त समिति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से वन क्षेत्र से जुड़ी बाधाओं का समाधान करते हुए प्रमुख पर्यटन स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ा जाए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने जिले की पर्यटन संपदा के संरक्षण के साथ उसके योजनाबद्ध विकास पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि पर्यटन स्थलों को मूलभूत सुविधाओं, बेहतर संपर्क मार्ग और आवश्यक प्रचार-प्रसार से जोड़ा जाए तो सोनभद्र देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
इस अवसर पर विनय केशरी, राजेश भारती, सुनील शुक्ल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।






