आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सेवानिवृत्त अधिकारी से करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का सोनभद्र पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य अभियुक्त समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में साइबर ठगी का ऐसा तरीका सामने आया है, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया। गिरोह का पुरुष सदस्य खुद को महिला बताकर पीड़ितों से चैट करता था और अपनी मंगेतर की तस्वीरों का इस्तेमाल कर उन्हें भावनात्मक रूप से अपने विश्वास में लेता था। इसके बाद AI तकनीक से अश्लील तस्वीरें तैयार कर ब्लैकमेलिंग की जाती थी और विरोध करने पर पीड़ित तथा उनके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी जाती थी।
पुलिस के मुताबिक इसी तरह बनाए गए दबाव और डिजिटल अरेस्ट के भय के बीच सेवानिवृत्त अधिकारी से आरोपियों ने तीन अलग-अलग बैंक खातों में करीब 2.36 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ठगी की रकम में से 75 लाख रुपये होल्ड/फ्रीज कराए गए हैं। आरोपियों की निशानदेही पर ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार, 2.10 लाख रुपये नकद, पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन और इलाहाबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता का फर्जी आईडी कार्ड बरामद किया गया है।
महिला बनकर पहले दोस्ती, फिर शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल –
एसपी ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य अभियुक्त साइबर ठगी के लिए खुद पुरुष होते हुए महिला की पहचान का इस्तेमाल करता था। वह महिला बनकर पीड़ित से लगातार चैट करता और बातचीत के जरिए धीरे-धीरे भावनात्मक संबंध स्थापित करता था। विश्वास बढ़ाने के लिए आरोपी अपनी मंगेतर की तस्वीरों का इस्तेमाल करता था।
जब पीड़ित आरोपी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाता था, तब गिरोह का अगला खेल शुरू होता था। आरोपी AI तकनीक के जरिए अपनी मंगेतर की अश्लील तस्वीरें तैयार कर पीड़ित को भेजता था। इसके बाद इसी तकनीक का इस्तेमाल कर पीड़ित की भी अश्लील तस्वीरें तैयार की जाती थीं और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता था।
परिवार को जान से मारने की धमकी से बनाया दबाव –
“पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि “ब्लैकमेलिंग के साथ आरोपियों ने पीड़ितों पर ऐसा मानसिक दबाव बनाया कि वे उनके निर्देशों का पालन करने लगे। रकम देने से इनकार करने या पुलिस से संपर्क करने पर पीड़ित के परिजनों को जान से मारने आकी धमकी तक दी जाती थी। इसी भय का इस्तेमाल करते हुए आरोपी लगातार धनराशि की मांग करते थे। इसी नेटवर्क ने सेवानिवृत्त अधिकारी को हायर ज्यूडिशियरी और शासन के अधिकारियों का भय दिखाकर कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट किया और उनसे करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लिया।”
बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला मामला –
मामला 22 सितंबर 2026 को उस समय सामने आया, जब भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक ने साइबर क्राइम थाना सोनभद्र को सूचना दी कि एक सेवानिवृत्त कर्मचारी लगातार किसी व्यक्ति के बताए खातों में रकम ट्रांसफर कर रहा है। वह पूछताछ में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा था और उसकी स्थिति से प्रतीत हो रहा था कि वह किसी दबाव में है। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी टीम के साथ बैंक पहुंचे, लेकिन तब तक संबंधित व्यक्ति बैंक से जा चुका था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और पूरे मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा को दी।
वहीं एसपी अभिषेक वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन ऋषभ रुणवाल को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए। क्षेत्राधिकारी साइबर हर्ष पाण्डेय के पर्यवेक्षण में साइबर थाना और साइबर सेल की टीमों ने जांच तेज कर दी।
₹2.36 करोड़ तीन खातों में कराए ट्रांसफर –
पूछताछ और जांच में पता चला कि आरोपियों ने पीड़ित को हायर ज्यूडिशियरी और शासन के अधिकारियों का भय दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। लगातार दबाव बनाते हुए उससे तीन अलग-अलग बैंक खातों में करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए थे। आरोपी इसके बाद भी और धनराशि की मांग कर रहे थे। पुलिस ने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और खातों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस के प्रयास से 75 लाख रुपये होल्ड/फ्रीज कराए गए।
AI और फर्जी दस्तावेजों से तैयार करते थे जाल –
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह तकनीक का दुरुपयोग कर डीपफेक इमेज, AI-generated अश्लील तस्वीरें और फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। फर्जी पहचान और प्रभावशाली अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर पीड़ितों को भयभीत किया जाता था। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस टीम मुख्य अभियुक्त तक पहुंची। उसे प्रयागराज स्थित ओमेक्स अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा हैरियर कार और 2.10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
दो महिलाएं भी गिरफ्तार –
मामले में मुख्य अभियुक्त का सहयोग करने के आरोप में दो महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरुण कुमार दूबे पुत्र हर्ष प्रसाद दूबे, निवासी विजयपुर कलना, चुनार, मिर्जापुर, प्रियंका मिश्रा पत्नी स्व0 संतोष कुमार मिश्रा, निवासी घोड़गल्ली, श्रीवर्धन, रायगढ़, महाराष्ट्र तथा तेजल पुत्री स्व. संतोष कुमार मिश्रा, निवासी घोड़गल्ली, श्रीवर्धन, रायगढ़, महाराष्ट्र के रूप में हुई है।
अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में ये रहे शामिल –
अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी, प्रभारी निरीक्षक थाना ओबरा नागेश कुमार सिंह, साइबर थाना उ0नि0 बृजेश दुबे, हे0का0 संजय वर्मा, मनीष सिंह, का0 जय प्रकाश सरोज, का0 सुनील रावत शामिल रहे।





