आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । किसानों की समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर जिलाध्यक्ष रामबहादुर सिंह के नेतृत्व में आयोजित धरने में किसानों की समस्याओं से जुड़े 16 सूत्रीय मांगपत्र को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। इस दौरान विन्ध्य एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण, खाद की उपलब्धता, किसान सम्मान निधि, बिजली कटौती, फार्मर रजिस्ट्री, सिंचाई और कृषि उपज के उचित विपणन सहित कई मुद्दे प्रमुखता से उठे।
विन्ध्य एक्सप्रेसवे के संरेखण में बदलाव की मांग –
जिला प्रवक्ता ज्योति जंग सिंह ने विन्ध्य एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण 2013 के कानून के प्रावधानों के अनुरूप किया जाना चाहिए। उन्होंने एक्सप्रेसवे का संरेखण बदलने की मांग करते उहुए कहा कि इससे करीब 2019 हेक्टेयर कृषि योग्य त्रिफसली भूमि बचाई जा सकती है। उन्होंने जरगो बांध के आगे सड़क को नौगढ़ बांध, भैसौड़ा और विजयगढ़ किले के पास से निकालने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक इससे सड़क की लंबाई और लागत कम होने के साथ एक फसली भूमि के मुआवजे का भार भी कम हो सकता है। उन्होंने भूमि अधिग्रहण में आरआर रूल्स का पालन कराने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जनप्रतिनिधि रीलबाज हो गए हैं, उन्हें जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि गांवों में किसान और आम जनता अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर परेशान हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने के बजाय दिखावे की राजनीति में अधिक दिलचस्पी नजर आ रही है।”
वहीं सपा नेता विवेक सिंह पटेल ने सोनभद्र की खनिज संपदा को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि “जिले की पहाड़ियों में लाखों टन सोना दबा है, जिसे सरकार अपने उद्योगपति मित्रों को देना चाहती है।” उन्होंने कहा कि जिले की प्राकृतिक और खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां के लोगों और किसानों के हितों का होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद धरना स्थल पर मौजूद किसानों के बीच खनिज संपदा और स्थानीय हितों से जुड़े सवाल भी चर्चा का विषय रहे।”
धरने को संबोधित करते हुए प्रान्त उपाध्यक्ष राम जी मौर्य ने कहा कि “चुनाव के समय राजनीतिक दलों को किसान और किसान हित याद आता है, लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद किसानों की समस्याएं भुला दी जाती हैं। उन्होंने किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की।”
प्रदेश मंत्री अखिलेश सिंह ने कहा कि “देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसके बावजूद कृषि क्षेत्र के प्रति उदासीन रवैया स्वीकार्य नहीं है। सरकार को किसान हित में प्रभावी कृषि नीति बनाने की आवश्यकता है।”
प्रान्त मंत्री सदानन्द मौर्य ने किसान सम्मान निधि में राज्य सरकार का सहयोग बढ़ाते हुए किसानों को 12 हजार रुपये वार्षिक सम्मान निधि देने की मांग की।
खाद, फार्मर रजिस्ट्री और बिजली कटौती पर भी आक्रोश –
जिलामंत्री प्रभुपाल मौर्य ने समितियों पर उर्वरक की कथित कालाबाजारी और समय से खाद उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि खतौनी में अंश निर्धारण नहीं होने से किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। उन्होंने अंश निर्धारण का कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की।
घोरावल ब्लॉक अध्यक्ष रामबिलास मौर्य ने ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित विद्युत कटौती से किसानों को निजात दिलाने की मांग की। कर्मा, रॉबर्ट्सगंज, चतरा और नगवां ब्लॉक के पदाधिकारियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखीं। किसानों ने टमाटर, मिर्च, सिंचाई, विपणन और कृषि उपज के उचित मूल्य से जुड़े मुद्दे भी उठाए।
सभा के अंत में जिलाध्यक्ष रामबहादुर सिंह ने किसानों और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि संगठन में ही शक्ति है। उन्होंने आगामी सदस्यता वर्ष में अधिक से अधिक किसानों को संगठन से जोड़ने का आह्वान किया। इसके बाद धरना-प्रदर्शन के समापन की घोषणा की गई।






