आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज स्थित इंडेन गैस एजेंसी के संचालन को लेकर अब मामला जिला मुख्यालय से निकलकर राजधानी लखनऊ तक पहुंच गया है। भाजपा उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल द्विवेदी ने लखनऊ के विभूति खंड, गोमती नगर स्थित IOCL कार्यालय पहुंचकर LPG के प्रदेश प्रमुख भोद्रो लकरा से मुलाकात की और रॉबर्ट्सगंज गैस एजेंसी के कथित संचालन में अनियमितताओं को लेकर शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में एजेंसी के संचालन, आरक्षित कोटे की शर्तों, गोदाम की कथित रजिस्ट्री तथा उपभोक्ताओं से KYC और होम डिलीवरी के नाम पर कथित अतिरिक्त वसूली जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
अनिल द्विवेदी ने शिकायत में आरोप लगाया कि रॉबर्ट्सगंज गैस एजेंसी (इंडेन), चंडी होटल, राबर्ट्सगंज विशेष आरक्षित कोटे के तहत आवंटित एजेंसी है। उनके मुताबिक एजेंसी का आवंटन सुरेन्द्र स्वरूप के नाम से हुआ है, जबकि इसका वास्तविक संचालन कथित रूप से विनय अग्रवाल द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले में IOCL के निर्धारित नियमों और एजेंसी के आवंटन की शर्तों की जांच कराने की मांग की है।
आरक्षित एजेंसी के संचालन को लेकर उठाया बड़ा सवाल –
भाजपा नेता का आरोप है कि विशेष आरक्षित श्रेणी की एजेंसी के संचालन और उसके हस्तांतरण को लेकर निर्धारित नियम हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि एजेंसी का संचालन वर्तमान में किसके द्वारा और किस अधिकार के आधार पर किया जा रहा है।
उन्होंने IOCL से एजेंसी से जुड़े मूल दस्तावेज, डीलरशिप की शर्तें, अधिकृत संचालक और वर्तमान संचालन व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
KYC से लेकर होम डिलीवरी तक वसूली के आरोप –
शिकायत में उपभोक्ताओं से कथित अतिरिक्त वसूली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। अनिल द्विवेदी ने आरोप लगाया कि गैस कनेक्शनधारियों से KYC के नाम पर कथित रूप से अतिरिक्त धन लिया जा रहा है, जबकि होम डिलीवरी के एवज में भी निर्धारित कीमत से अधिक रकम वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि गैस जैसी आवश्यक सेवा में उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली गंभीर विषय है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
गोदाम की कथित रजिस्ट्री ने भी खड़े किए सवाल –
शिकायत का सबसे गंभीर पहलू गैस एजेंसी के गोदाम से जुड़ा बताया गया है। अनिल द्विवेदी ने आरोप लगाया कि एजेंसी के गोदाम की कथित तौर पर बैनामा/रजिस्ट्री कराई गई है। उन्होंने इस हस्तांतरण की वैधता की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एजेंसी से संबंधित गोदाम के स्वामित्व में किसी प्रकार का हस्तांतरण हुआ है तो इसकी अनुमति किस आधार पर हुई और क्या यह IOCL के नियमों के अनुरूप था? उन्होंने पूरे दस्तावेजी रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
इतने वर्षों तक कैसे चलता रहा मामला –
अनिल द्विवेदी ने शिकायत में यह भी सवाल उठाया कि यदि एजेंसी के संचालन में लंबे समय से नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक कोई व्यवस्था चलती रही तो स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।




