आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गांव-गांव में समूहों को मजबूत करने और बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की जिम्मेदारी निभा रहीं समूह सखी एवं बैंक सखियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को बड़ी संख्या में समूह सखी एवं बैंक सखियों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने लंबित मानदेय का भुगतान कराने, मानदेय में वृद्धि करने के साथ ही मोबाइल, आवागमन और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। समूह सखियों का कहना है कि विभाग लगातार काम का दायरा बढ़ा रहा है, लेकिन उसके अनुपात में मानदेय और सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। महंगाई के इस दौर में महज दो हजार रुपये मासिक मानदेय में उनसे गांव-गांव फील्ड में दौड़ने, समूहों से जुड़े कार्य निपटाने, ब्लॉक मुख्यालय की बैठकों में पहुंचने और ऑनलाइन काम करने की अपेक्षा की जा रही है।
पांच हजार का मोबाइल भत्ता भी नाकाफी –
समूह सखी सबीना ने कहा कि “ऑनलाइन कार्य के लिए मोबाइल के नाम पर पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन आज के समय में पांच हजार रुपये में अच्छा स्मार्टफोन मिलना तो दूर, बेहतर कीपैड फोन खरीदना भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि विभाग ऑनलाइन काम का दबाव लगातार बढ़ा रहा है, ऐसे में केवल पांच हजार रुपये देकर मोबाइल की जिम्मेदारी पूरी मान लेना जमीनी हकीकत से दूर है। उन्होंने कहा कि मोबाइल में इंटरनेट, ऑनलाइन एप्लीकेशन और विभागीय कार्यों के लिए पर्याप्त क्षमता चाहिए। जब काम ऑनलाइन कराया जा रहा है तो उसके लिए संसाधन भी उसी स्तर के उपलब्ध कराने चाहिए।“
2000 रुपये में घर चलाएं या विभाग का काम करें?
समूह सखी सुनीता ने कहा कि “महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनका मानदेय अभी भी महज दो हजार रुपये है। महीने में कई बार ब्लॉक मुख्यालय बुलाया जाता है। इसके अलावा गांवों में फील्ड विजिट करनी पड़ती है और समूहों से संबंधित कार्यों के लिए लगातार दौड़भाग करनी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि दो हजार रुपये में घर चलाएं, बच्चों को पढ़ाएं या विभाग की सेवा करें? जब काम लगातार बढ़ाया जा रहा है तो मानदेय में भी उसी हिसाब से वृद्धि होनी चाहिए। उन्होंने प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से मानदेय निर्धारित करने की मांग की।”
तीन साल से ड्राई राशन का पैसा भी लंबित –
समूह सखी अंजनी सिंह ने कहा कि “उनकी समस्याएं केवल मानदेय तक सीमित नहीं हैं। पिछले करीब तीन वर्षों से ड्राई राशन का पैसा भी नहीं मिला है। इस संबंध में विभागीय स्तर पर पूछने पर जवाब मिलता है कि जब शासन से पैसा आएगा, तभी भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भुगतान लंबित रहने से काम करने वाली महिलाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। यदि सरकार और विभाग ग्रामीण महिलाओं से लगातार जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा करते हैं तो उनके मानदेय और अन्य देयकों का भुगतान भी समय से होना चाहिए।”
दुर्घटना बीमा और आवागमन की सुविधा की भी मांग –
ज्ञापन में समूह सखी एवं बैंक सखियों ने कहा कि उन्हें अपने कार्य के सिलसिले में लगातार गांवों और ब्लॉक मुख्यालयों के बीच आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में आवागमन के लिए उचित किराया, स्मार्टफोन की सुविधा और सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
उन्होंने दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिए दुर्घटना बीमा अथवा कैशलेस योजना का लाभ देने की भी मांग की। उनका कहना है कि फील्ड में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
समूह सखी एवं बैंक सखियों ने जिलाधिकारी से मांग किया कि दिसंबर माह से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान कराया जाए, मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए और तीन वर्षों से लंबित ड्राई राशन की राशि का भुगतान कराया जाए। इसके साथ ही मोबाइल, आवागमन और दुर्घटना सुरक्षा की मांगों पर भी जल्द निर्णय लिया जाए।





