आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । पुत्र की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना को लेकर शनिवार को जिले भर में महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) का कठिन निर्जल व्रत रखा। सुबह से ही व्रती महिलाओं में पूजा-अर्चना की तैयारियां चलती रहीं। शाम होते ही महिलाएं मंदिरों, तालाबों और सार्वजनिक पूजा स्थलों पर सामूहिक रूप से जुटीं और विधि-विधान के साथ जीवित्पुत्रिका माता का पूजन-अर्चन किया।
जिउतिया पर्व को लेकर रॉबर्ट्सगंज नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। उत्तर मोहल्ला, पूरब मोहल्ला, नई बस्ती, राम सरोवर तालाब, बड़ौली पोखरा और अकड़हवा पोखरा, हर्ष नगर, रेलवे फाटक समेत विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने समूह में पूजा की। पूजा स्थलों पर पारंपरिक गीत, सोहर और बधाई गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
दिनभर निर्जल रहीं व्रती महिलाएं –
व्रती महिलाओं ने बताया कि पुत्र की लंबी आयु और उसके सुखी एवं मंगलमय जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखा जाता है। व्रत के दौरान महिलाएं पूरे दिन जल और अन्न का त्याग कर उपवास रखती हैं। शाम को पूजा स्थल पर फल-फूल, मिष्ठान, खिलौने, जिउतिया, पूड़ी-पकवान और वस्त्र आदि अर्पित कर पूजन किया गया।
पूजन के दौरान कुश और गन्ने को गाड़कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी और सामूहिक रूप से सोहर, बधाई एवं अन्य मांगलिक गीत गाए।
बाजारों में भी रही रौनक –
जिउतिया पर्व को लेकर बाजारों में भी दिनभर चहल-पहल रही। पूजा-पाठ की सामग्री, फल, मिष्ठान और अन्य जरूरी सामान की दुकानों पर खरीदारी के लिए महिलाओं और परिवारों की भीड़ देखने को मिली। पर्व को लेकर फल विक्रेताओं और पूजा सामग्री की दुकानों पर विशेष रौनक रही।
व्रती प्रतिभा देवी ने बताया कि “यह व्रत माताओं के लिए बेहद कठिन माना जाता है। दिनभर निर्जल और निराहार रहकर पुत्र की दीर्घायु और मंगलकामना की जाती है। पूजा के बाद व्रती महिलाएं कथा सुनती हैं और मांगलिक गीतों के साथ व्रत की परंपरा पूरी करती हैं। उन्होंने बताया कि नवमी तिथि को पारण कर प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत खोला जाएगा।”
इस दौरान उमा केसरी, सपना, किरण देवी, सीमा, रानी, सुमन, उषा, गीता, श्वेता, पूजा, सरिता, रीता, बबीता, निशु, सीमा समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।





