आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । रॉबर्ट्सगंज तहसील में लेखपालों और उपजिलाधिकारी सदर आशीष त्रिपाठी के बीच चल रहा विवाद में अब सदर एसडीएम भी खुलकर सामने आ गए है। जहां लेखपालों के लगातार चौथे दिन कार्य बहिष्कार जारी रखा और एसडीएम पर कथित दुर्व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना, मौखिक आदेशों और मनमाने रवैये का आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग पर अड़े हैं, वहीं एसडीएम ने लेखपाल रामचंद्र के खिलाफ हुई जांच और उसमें सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए कार्य बहिष्कार को दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
सेराबर्ट्सगंज तहसील अध्यक्षंजय सिंह का आरोप है कि धारा 24 के मामले में पत्थरगढ़ी नहीं किए जाने को लेकर लेखपाल रामचंद्र के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की गई। उनका कहना है कि कार्यवाही किस नियम के तहत की गई, यह पूछे जाने पर अधिकारी नाराज हो जाते हैं। लेखपालों ने जांच आख्या 18 सितंबर को प्राप्त होने के बावजूद मामले में निर्णय टालने, अनुचित शब्दों का प्रयोग करने, मौखिक आदेश देकर काम कराने और बाद में उससे अलग रुख अपनाने जैसे आरोप भी लगाए हैं। लेखपाल संघ का कहना है कि कथित मानसिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार से क्षुब्ध होकर उन्होंने संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू किया है। लेखपाल एसडीएम सदर के स्थानांतरण तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
एसडीएम ने जांच रिपोर्टों का रखा पूरा पक्ष –
वहीं एसडीएम आशीष त्रिपाठी ने लेखपालों के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि रामचंद्र लेखपाल के खिलाफ क्षेत्र से लगातार शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। उनके अनुसार एक शिकायत मंडलायुक्त विंध्याचल मंडल, मिर्जापुर के समक्ष पहुंची थी, जिस पर जिलाधिकारी को एडीएम स्तर के अधिकारी से जांच कराकर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
एसडीएम के मुताबिक अपर जिलाधिकारी न्यायिक रमेश चंद्र यादव ने मामले की जांच की। जांच में रामचंद्र को एक पैमाइश की पत्रावली तीन वर्ष तक लंबित रखने का दोषी पाया गया। एसडीएम ने दावा किया कि जांच आख्या में आवेदक की पत्नी के सामने 20 हजार रुपये मांगने और उसमें से 10 हजार रुपये लिए जाने का भी उल्लेख है।
एक जांच में दोषी, दूसरी में निर्दोष –
एसडीएम ने बताया कि एडीएम स्तर की जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई के लिए पत्रावली तहसील स्तर पर भेजी गई। इसके बाद तहसीलदार न्यायिक राजेश यादव को जांच अधिकारी बनाया गया। एसडीएम के अनुसार तहसीलदार न्यायिक की जांच में रामचंद्र को दोषमुक्त कर दिया गया।
एसडीएम ने कहा कि पूर्व की जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए उन्होंने इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और दोबारा जांच के लिए तहसीलदार रॉबर्ट्सगंज को जांच अधिकारी नामित किया गया। तहसीलदार न्यायिक की रिपोर्ट के संबंध में जिलाधिकारी को भी आख्या भेजी गई है।
लेखपालों के आंदोलन को बताया दबाव की कोशिश –
एसडीएम आशीष त्रिपाठी ने कहा कि लेखपालों का कार्य बहिष्कार और स्थानांतरण की मांग रामचंद्र लेखपाल को राहत दिलाने के लिए बनाए जा रहे दबाव से भी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि रामचंद्र की डीपीसी प्रस्तावित है और उन्हें दोषमुक्त कराकर राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उनकी तैनाती के बाद से लेखपालों के कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है और शासन व राजस्व परिषद की योजनाओं का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए जाते हैं। गलत कार्यों पर अंकुश लगाने और कार्य की गुणवत्ता सुधारने को लेकर भी लगातार निर्देशित किया गया है।






