आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । गिट्टी-बालू के परिवहन में कथित ओवरलोडिंग को लेकर सोनभद्र में ट्रक मालिकों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को सोनभद्र ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में ट्रक मालिक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ट्रक मालिकों ने निर्धारित परमिट से अधिक खनिज लादकर परिवहन किए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
एसोसिएशन का दावा है कि जनपद में प्रतिदिन करीब एक हजार वाहन गिट्टी-बालू के परिवहन में लगे हैं। आरोप है कि 20 घन मीटर के निर्धारित परमिट के सापेक्ष कुछ वाहनों में करीब 30 घन मीटर तक खनिज का परिवहन किया जा रहा है। यदि प्रति वाहन औसतन 10 घन मीटर अतिरिक्त खनिज परिवहन की स्थिति मानी जाए तो एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 50 लाख रुपये के अतिरिक्त खनिज का परिवहन हो रहा है।
एक महीने में 15 करोड़, सालभर में 182 करोड़ के खनिज का अनुमान –
ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने ज्ञापन में गणना प्रस्तुत करते हुए कहा कि एक हजार वाहनों में यदि औसतन 10 घन मीटर अतिरिक्त खनिज और न्यूनतम 500 रुपये प्रति घन मीटर का मूल्य माना जाए तो प्रतिदिन करीब 50 लाख रुपये का अतिरिक्त खनिज मूल्य बनता है। 30 दिनों में यह आंकड़ा करीब 15 करोड़ रुपये और सालभर में लगभग 182 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि 182 करोड़ रुपये का आंकड़ा केवल अतिरिक्त खनिज के अनुमानित मूल्य पर आधारित है। वास्तविक सरकारी राजस्व की संभावित क्षति का आकलन खनिज मूल्य, रॉयल्टी, शास्ति और अन्य वैधानिक देयताओं के आधार पर संबंधित विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
सिर्फ चालक नहीं, लोडिंग प्वाइंट की भी तय हो जिम्मेदारी –
ट्रक मालिकों ने कहा कि ओवरलोडिंग मिलने पर कार्रवाई केवल चालक या वाहन स्वामी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रशासन को यह भी पता लगाना चाहिए कि वाहन में निर्धारित मात्रा से अधिक खनिज किस लोडिंग प्वाइंट से लादा गया और किसकी अनुमति अथवा लापरवाही से लोड हुआ।
एसोसिएशन ने प्रत्येक लोडिंग प्वाइंट पर वाहन की वास्तविक मात्रा अथवा वजन की जांच, वजन पर्ची और डिजिटल रिकॉर्ड को अनिवार्य एवं प्रभावी बनाने की मांग की है।
जांच चौकी से ओवरलोड वाहन निकलने पर भी उठाए सवाल –
एसोसिएशन ने रॉबर्ट्सगंज खनिज जांच चौकी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। ट्रक मालिकों का कहना है कि यदि कोई वाहन निर्धारित परमिट से अधिक खनिज लेकर जांच चौकी पार कर जाता है और बाद में किसी दूसरे स्थान पर पकड़ा जाता है तो यह भी जांच होनी चाहिए कि जांच चौकी पर उस वाहन की जांच किस प्रकार हुई और उसे आगे जाने की अनुमति कैसे मिली।
उन्होंने वाहनों के ट्रांजिट पास, एमएम-11, फार्म-सी परमिट, वजन पर्ची, लोडिंग प्वाइंट के रिकॉर्ड, जांच चौकी के अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज का वाहनवार मिलान कराने की मांग की है।
डाला में फिर शुरू हो खनन चेक पोस्ट –
ट्रक मालिकों ने सोनभद्र की भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में भी निगरानी मजबूत करने की मांग की। उनका कहना है कि सोनभद्र चार राज्यों से घिरा है और यहां के खनन क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में उपखनिज दूसरे राज्यों में जाता है।
एसोसिएशन के मुताबिक डाला में पूर्व में छह नंबर बैरियर के नाम से जांच चौकी संचालित होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वहां प्रभावी जांच व्यवस्था नहीं है। इससे सीमावर्ती राज्यों की ओर जाने वाले वाहनों की निर्बाध आवाजाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। ट्रक मालिकों ने संबंधित मार्गों पर खनन चेक पोस्ट को प्रभावी रूप से संचालित करने की मांग की।
वैध कारोबार करने वालों के हितों की भी उठाई आवाज –
प्रदर्शन कर रहे ट्रक मालिकों ने कहा कि निर्धारित परमिट और नियमों के अनुसार परिवहन करने वाले वाहन स्वामियों को ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने ओवरलोडिंग पर सभी संबंधित पक्षों के खिलाफ समान कार्यवाही और वैध परिवहन करने वाले वाहन स्वामियों के हितों की सुरक्षा की मांग की।
एसोसिएशन ने जिलाधिकारी से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर लोडिंग प्वाइंट से लेकर जांच चौकी और गंतव्य तक वाहनों के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, लोडिंग प्वाइंट संचालक या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाए।






