आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिला भाजपा कार्यालय पर रविवार को भाजपा जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुप्ता, नगर पालिका अध्यक्ष रूबी प्रसाद और सदर विधायक भूपेश चौबे ने मीडिया से मुखातिब होकर कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। प्रशासनिक और संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से उसकी समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला।
इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष रूबी प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावी पराजय के बाद अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी संयुक्त स्पष्टीकरण के बाद SIR को लेकर लगाए जा रहे कई आरोपों पर स्थिति स्पष्ट हुई है। आयोग ने कहा है कि 24 जून 2025 को जारी SIR का मूल आदेश और बाद में जारी समय-सारिणी संबंधी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार, 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था।
नगर पालिका अध्यक्ष रूबी प्रसाद ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर भी विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए थे, लेकिन निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि यह पत्र किसी नीतिगत निर्णय अथवा उसके IT प्रभाग से संबंधित नहीं था। आयोग के मुताबिक मामला प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से संबंधित प्रशासनिक विषय था।
वहीं सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से जारी बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि SIR के दौरान छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर BLO घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे।
वहीं उन्होंने कहा कि Form-6 और मतदाता सूची को लेकर भी भ्रम फैलाने के बजाय निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक तथ्यों को सामने रखना चाहिए। आयोग ने अपने बयान में कहा है कि SIR के दौरान छूटे मतदाताओं और नए मतदाताओं को निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
ईवीएम से लेकर चुनाव आयोग तक सवाल उठाने का लगाया आरोप –
जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से समय-समय पर EVM, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय अपने संगठन, नीतियों और जनसंपर्क की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के पूर्व बयानों का उल्लेख करते हुए EVM, राफेल, सर्जिकल स्ट्राइक और न्यायपालिका से जुड़े उनके बयानों पर भी सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और राजनीतिक मतभेदों को संस्थागत प्रतिष्ठा के विवाद में बदलने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस यदि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल उठाती है तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ संबंधित संवैधानिक मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जा रहे आरोपों की समीक्षा करने और तथ्यों का सम्मान करने की अपील की।






