आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में अब विद्यार्थियों को सिर्फ डस्टबिन में कचरा डालने की सीख नहीं दी जाएगी, बल्कि किस तरह के कचरे को किस डिब्बे में डालना है, इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विद्यालयों में कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए चार रंग के डस्टबिन रखना अनिवार्य किया गया है। इसके जरिए बच्चों को गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग करने की जानकारी दी जाएगी।
यह पहल ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत की जा रही है। अभियान के दौरान विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों को भी प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और कचरे के उचित निस्तारण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
चार रंग बताएंगे कचरे की पहचान –
विद्यालयों में हरे रंग के डस्टबिन में गीला कचरा रखा जाएगा। इसमें भोजन के अवशेष, फल-सब्जियों के छिलके और अन्य जैविक कचरा शामिल होगा। नीले डस्टबिन में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसे सूखे कचरे का निस्तारण किया जाएगा। वहीं लाल डस्टबिन का इस्तेमाल सेनेटरी अपशिष्ट के लिए होगा। इसमें इस्तेमाल किए गए बैंडेज समेत अन्य स्वच्छता संबंधी कचरा रखा जाएगा। काले डस्टबिन में बैटरी, बल्ब, ट्यूबलाइट, इस्तेमाल की गई दवाएं, एक्सपायरी सामग्री, टूटे थर्मामीटर और अन्य जोखिम वाले कचरे को अलग रखा जाएगा।
स्कूलों में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर जोरदार रोक –
रिषदीय विद्यालयों में प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने के साथ ही बच्चों को कचरे के सही निस्तारण की जानकारी दी जाएगी। दो अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बीएसए मुकुल आनंद पांडेय ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को 30 सितंबर तक आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयों में चारों रंग के डस्टबिन की उपलब्धता और उनके नियमित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को दी गई है।
ई-कचरे के लिए बनेगा अलग संग्रह केंद्र –
विद्यालयों से निकलने वाले खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए अलग संग्रह केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसके लिए विद्यालय स्तर पर ई-कचरा एकत्र कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका निस्तारण कराया जाएगा।
दो अक्तूबर को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर विद्यालयों में विशेष स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को स्वच्छता, कचरा पृथक्करण और पर्यावरण संरक्षण को दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बीएसए बोले- बच्चों को व्यवहारिक रूप से सिखाएंगे कचरा प्रबंधन
बीएसए मुकुल आनंद पांडेय ने कहा कि “स्वच्छता केवल परिसर की सफाई तक सीमित नहीं है। बच्चों को शुरुआत से ही कचरे को अलग-अलग करने और उसके उचित निस्तारण की आदत डालना जरूरी है। विद्यालयों में चार रंग के डस्टबिन उपलब्ध कराने के साथ विद्यार्थियों को इनके सही इस्तेमाल का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को 30 सितंबर तक आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डस्टबिन की उपलब्धता और नियमित इस्तेमाल की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।”






