आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । तीन दिन तक हुई लगातार बारिश के बाद मौसम बदला तो बीमारियों ने भी दस्तक दे दी। जिले में बदलते मौसम के बीच बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। रविवार को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में मरीजों की भीड़ ने इसकी तस्वीर साफ कर दी। सुबह से ही स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज पहुंचते रहे। सबसे अधिक शिकायत बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी और सिरदर्द की रही। बच्चों और बुजुर्गों को भी मौसम के बदलाव का असर झेलना पड़ा। इस दौरान आरोग्य मेले का 50 से अधिक मरीजों ने लाभ लिया।
स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचे मरीजों की चिकित्सकों ने बीमारी की अवधि और लक्षणों की जानकारी लेने के साथ स्वास्थ्य जांच की। जांच के बाद जरूरत के अनुसार दवाएं दी गईं। चिकित्सकों ने बारिश के बाद वायरल और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को साफ पानी पीने, ताजा भोजन करने, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखने और बारिश में भीगने से बचने की सलाह दी।
बुखार के बढ़े मरीज, लेकिन आरोग्य मेले में चिकित्सा विभाग ही अधूरा –
एक ओर मौसम की मार से लोग बीमार पड़ रहे हैं और दूसरी ओर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में आयुष और होम्योपैथिक विभाग की ओर से चिकित्सक अथवा स्टाफ के मौजूद नहीं रहने की बात सामने आई। इससे मेले की व्यवस्थाओं और विभागीय समन्वय पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोग्य मेले का मकसद मरीजों को एक ही स्थान पर विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि मेले में संबंधित विभागों के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी ही मौजूद न हों तो मरीजों को इन सेवाओं का लाभ कैसे मिलेगा? खासकर तब, जब बदलते मौसम में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही हो।
त्वचा रोग से लेकर उल्टी-दस्त तक के पहुंचे मरीज –
रविवार को बुखार और सर्दी-जुकाम के अलावा त्वचा रोग, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बदन दर्द और चक्कर आने की शिकायत वाले मरीज भी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचे। हाई ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर समस्या वाले मरीजों को बेहतर जांच एवं उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किए जाने की सलाह दी गई।
सिर्फ दवा बांटना नहीं, व्यवस्था की भी जरूरत
बारिश के बाद मौसम में बदलाव के बीच मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल मरीजों को दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि आरोग्य मेले में सभी संबंधित चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित करनी होगी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे थे, तब आयुष और होम्योपैथिक विभाग की सेवाएं उपलब्ध क्यों नहीं थीं? क्या संबंधित विभागों की उपस्थिति महज कागजों तक सीमित है या वास्तव में मरीजों तक सभी चिकित्सा सेवाएं पहुंच रही हैं।
इस दौरान अधीक्षक डॉ0 जे0बी0 सिंह, फार्मासिस्ट मनोज कुमार, पुष्पेंद्र शुक्ला, एएनएम मीना भारती, स्टाफ नर्स चंद्रकला समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।





