वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में डॉक्टरों की टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शनिवार को नेत्र रोग विभाग और ओरल मैक्सिलोफेशियल विभाग की संयुक्त टीम ने आधुनिक ‘ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम’ तकनीक का पहली बार सफल उपयोग करते हुए एक मरीज के चेहरे की अत्यंत जटिल सर्जरी की। चार घंटे तक चले इस कठिन ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने मरीज के चेहरे पर 80 टांके लगाए और 10 टाइटेनियम मिनी प्लेट व स्क्रू लगाकर चेहरे और जबड़े की हड्डियों को दोबारा सही आकार दिया। इस सफल सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी आंखों की रोशनी भी सुरक्षित है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलिया जिले के बेल्थरा निवासी 46 वर्षीय जीत बहादुर को घर पर चारा खिलाते समय उनकी ही पालतू गाय ने उठाकर पटक दिया था। इस भीषण हादसे में उनकी बाईं आंख के आसपास की हड्डियां और जबड़ा बुरी तरह टूट गया था, आंख अंदर धंस गई थी तथा मुंह खोलना भी असंभव हो गया था। आईएमएस बीएचयू में जांच के दौरान चेहरे की हड्डियों में गंभीर फ्रैक्चर की पुष्टि होने पर क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष प्रो. आरपी मौर्य के कुशल मार्गदर्शन में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक इमेज-गाइडेड नेविगेशन सिस्टम की मदद से सर्जरी को अंजाम दिया। प्रो. मौर्य ने बताया कि तकनीक के प्रयोग से चेहरे की प्राकृतिक संरचना को सफलतापूर्वक बहाल कर दिया गया है, जिससे मरीज अब सामान्य रूप से भोजन कर सकेगा और उसकी देखने की क्षमता पर भी कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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