आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• मनरेगा के मजदूर-मिस्त्री व मैटेरियल का भुगतान दो साल से लंबित होने का दावा
• 10 ब्लॉकों में करीब 56 करोड़ रुपये बकाया होने का लगाया आरोप
सोनभद्र । ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों से जुड़े मजदूरों, मिस्त्रियों और मैटेरियल के भुगतान में कथित देरी को लेकर राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले ग्राम प्रधानों ने प्रदर्शन किया। संगठन की जिलाध्यक्ष गीता सिंह के नेतृत्व में प्रधानों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतान कराने तथा ग्राम पंचायतों में वित्तीय कार्यों को सुचारु करने की मांग उठाई।
प्रधानों का कहना है कि मनरेगा के तहत पूर्व में कराए गए कार्यों के मजदूर और मैटेरियल का भुगतान करीब दो वर्षों से लंबित है। संगठन के मुताबिक 10 ब्लॉकों में लेबर व मिस्त्री के करीब 56 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि अकेले नगवां ब्लॉक में लगभग 6.43 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया गया है। प्रधानों का दावा है कि लेबर भुगतान के लिए ब्लॉक स्तर से डोंगल भी लगा दिया गया है, बावजूद इसके भुगतान ट्रेजरी स्तर पर अटका हुआ है।
प्रशासक बने प्रधान, फिर भी वित्तीय पेच में फंसे काम –
ग्राम प्रधानों ने कहा कि प्रदेश में यह पहली बार हुआ है कि पंचायतों का निर्वाचित कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। शासन के निर्णय के अनुसार 27 मई 2026 से प्रधानों को सामान्य एवं रूटीन पंचायत कार्यों के लिए प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है और यह व्यवस्था नई पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह तक, जो पहले हो, लागू रहने की बात कही गई है।
लेकिन प्रधानों का कहना है कि प्रशासक की जिम्मेदारी मिलने के बावजूद वित्तीय कार्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से गांवों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हैंडपंप, पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों से जुड़े कार्य भी बाधित होने का दावा किया गया है। प्रधानों ने मांग की कि प्रशासकों के वित्तीय अधिकारों और कार्यों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि गांवों में जरूरी विकास कार्यों को गति मिल सके।
एक सप्ताह में भुगतान की व्यवस्था लागू करने की मांग –
ज्ञापन में जी-रामजी योजना में कार्यों की जटिलता दूर करने तथा काम कर रहे मजदूरों और मैटेरियल आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान की प्रक्रिया अधिकतम एक सप्ताह के भीतर पूरी करने की मांग रखी गई। प्रधानों ने कहा कि भुगतान में लगातार हो रही देरी का सीधा असर ग्रामीण मजदूरों और गांवों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान प्रधानों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट कराने, ट्रेजरी स्तर पर अटके भुगतान को जारी कराने और प्रशासकों के वित्तीय कार्यों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की।
इस दौरान मंगला प्रसाद, बुल्लू, लीलावती, परमानंद, रज्जब अली, मो0 अयूब, आरती देवी, सूर्य प्रताप सिंह, भुनेश्वर, सतीश कुमारसहित बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान मौजूद रहे।





