आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । लंबित मांगों पर 45 दिन बाद भी प्रभावी कार्रवाई न होने से लेखपालों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। शासन-प्रशासन का ध्यान लगातार आकृष्ट कराने के बावजूद मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल न होने पर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को आंदोलन के प्रथम चरण में रॉबर्ट्सगंज और घोरावल तहसील क्षेत्र के लेखपालों ने अतिरिक्त हल्कों का कार्य बहिष्कार करते हुए अपने बस्ते तहसील कार्यालयों में जमा कर दिए।
लेखपालों के इस कदम से अतिरिक्त हल्कों से जुड़े राजस्व कार्यों पर असर पड़ने की स्थिति बन गई है। संघ ने साफ संकेत दिया है कि यदि मांगों को लेकर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।
रॉबर्ट्सगंज में 43 लेखपालों ने जमा किया बस्ता –
रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र में 43 लेखपालों ने 141 अतिरिक्त हल्कों का बस्ता तहसील कार्यालय में जमा कर कार्य बहिष्कार किया। लेखपालों का कहना है कि अतिरिक्त कार्य का बोझ लंबे समय से बना हुआ है, जबकि उनकी मूल मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
कार्य बहिष्कार के दौरान सदर तहसील अध्यक्ष संजय सिंह, मंत्री साजिद खान वारसी, अजय चौधरी, मनीष पंकज, अभिनव, शैलेन्द्र और सुरेंद्र सहित अन्य लेखपाल मौजूद रहे।
घोरावल में 25 अतिरिक्त हल्कों का काम ठप –
वहीं घोरावल तहसील क्षेत्र में भी आंदोलन का असर साफ दिखाई दिया। यहां 25 लेखपालों ने 131 अतिरिक्त हल्कों के बस्ते तहसील कार्यालय में जमा कर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।
इस दौरान जिलामंत्री चंद्रशेखर, तहसील घोरावल अध्यक्ष गोपेन्द्र देव पाण्डेय, राहुल कुमार, रवि, आदित्य, अजय विक्रम सिंह, गौरव, धीरज पटेल, अशोक जायसवाल, सूरज, राजा मान सिंह, भगत सिंह, शिव कुमार और सुशील वैश्य समेत अन्य लेखपाल मौजूद रहे।
चार मांगों पर अटका मामला –
जिलाध्यक्ष अमित शुक्ल ने कहा कि “प्रमुख लंबित मांगों में पदोन्नति, 2800 ग्रेड पे, भत्ता वृद्धि तथा टेक्निकल पद पर कार्यवृत्ति शामिल हैं। इन मांगों को लेकर संगठन लंबे समय से शासन स्तर पर आवाज उठाता रहा है। वार्ता और आश्वासनों के 45 दिन बीतने के बावजूद जब अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया तो अब चरणबद्ध आंदोलन शुरू करना पड़ा है। आंदोलन के प्रथम चरण में अतिरिक्त हल्कों का बस्ता जमा कर कार्य बहिष्कार किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा।”






