आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य और अति पिछड़े जिलों में शामिल जनपद सोनभद्र में बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने और उन्हें नियमित टीकाकरण का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान को नई गति दी है। जिले के दूरस्थ गांवों में रहने वाले परिवारों तक टीकाकरण का संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से GAVI Zero Dose Phase-II कार्यक्रम के अंतर्गत ‘टीका मित्र LED वैन’ और ई-रिक्शा की शुरुआत की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर दोनों वाहनों को रवाना किया। यह पहल जिले के चयनित 84 गांवों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन बच्चों की पहचान करने पर केंद्रित है, जिन्हें अब तक टीके की पहली खुराक नहीं मिली है या जो नियमित टीकाकरण से छूट गए है
उत्तर प्रदेश के 60 जनपदों में संचालित इस कार्यक्रम के तहत सोनभद्र में भी घर-घर तक जागरूकता पहुंचाने और अभिभावकों को बच्चों के पूर्ण टीकाकरण के लिए प्रेरित करने की योजना है। अभियान का उद्देश्य साफ है—जानकारी के अभाव या जागरूकता की कमी के कारण किसी भी बच्चे को जरूरी टीकों से वंचित न रहना पड़े।
84 गांवों तक पहुंचेगी टीकाकरण की जागरूकता –
सोनभद्र के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में ‘टीका मित्र’ LED वैन और ई-रिक्शा के जरिए चयनित गांवों में लोगों को टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी जाएगी। प्रचार अभियान के माध्यम से अभिभावकों को बताया जाएगा कि बच्चों को निर्धारित समय पर सभी आवश्यक टीके लगवाना क्यों जरूरी है और टीकाकरण उन्हें कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाने में किस तरह मदद करता है।
अभियान के दौरान टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने, परिवारों को जागरूक करने और नियमित टीकाकरण सेवाओं से छूटे बच्चों तक पहुंच बनाने पर विशेष जोर रहेगा। इससे उन परिवारों को भी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है, जो अब तक किसी कारणवश टीकाकरण कार्यक्रम का पूरा लाभ नहीं उठा पाए हैं।
क्या होते हैं जीरो डोज बच्चे, क्यों है उनकी पहचान जरूरी –
जीरो डोज यानी शून्य खुराक वाले बच्चे वे हैं, जिन्हें नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत डीपीटी युक्त टीके की पहली खुराक भी नहीं मिली है। ऐसे बच्चों की पहचान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे टीकाकरण से मिलने वाली सुरक्षा से वंचित रह सकते हैं।
GAVI Zero Dose Phase-II कार्यक्रम के तहत ऐसे बच्चों तक पहुंचने के साथ उन बच्चों की भी पहचान की जाएगी, जिनका नियमित टीकाकरण अधूरा रह गया है। इसके बाद उन्हें उपलब्ध टीकाकरण सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस दिशा में जागरूकता के साथ स्वास्थ्य विभाग और संबंधित टीमों के बीच समन्वय भी अहम होगा।
बोले सीएमओ- हर बच्चे तक पहुंचे टीकाकरण का सुरक्षा कवच
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने कहा कि “बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है। GAVI Zero Dose Phase-II के तहत शुरू की गई यह पहल उन बच्चों तक पहुंचने में मदद करेगी, जो किसी कारणवश नियमित टीकाकरण से छूट गए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का निर्धारित समय पर सभी आवश्यक टीके लगवाएं और आसपास के परिवारों को भी टीकाकरण के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से लोगों की भ्रांतियों को दूर करना और छूटे हुए बच्चों को टीकाकरण सेवाओं से जोड़ना जरूरी है, ताकि कोई भी बच्चा सुरक्षा कवच से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि आठों ब्लॉकों में तीन टीमें ‘टीका मित्र’ LED वैन और ई-रिक्शा से भ्रमणकर लोगों को जागरुक करेंगी।”
स्वास्थ्य विभाग के साथ सहयोगी संस्थाएं भी जुटीं –
‘टीका मित्र’ LED वैन और ई-रिक्शा के शुभारंभ के अवसर पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ0 गिरिशारी लाल, अर्बन क्षेत्र के चिकित्सा अधीक्षक/प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ0 जे0पी0 सिंह, GAVI Zero Dose Phase-II कार्यक्रम के IPE CKD के जिला समन्वयक रोहित सिंह, ब्लॉक समन्वयक महेश प्रसाद, JSI के जिला समन्वयक बेयलाल तथा DCC नसीम उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम IPE CKD द्वारा GAVI Zero Dose Phase-II के अंतर्गत UNICEF के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। अभियान में संबंधित संस्थाओं के सहयोग से टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और छूटे हुए बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जागरूकता से आगे टीकाकरण तक पहुंचना होगी असली सफलता –
सोनभद्र जैसे आदिवासी बाहुल्य और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों वाले जिले में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है, लेकिन अभियान की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब चिह्नित बच्चों को वास्तव में टीके लगें और उनका नियमित टीकाकरण पूरा हो। इसके लिए गांव स्तर पर बच्चों की पहचान, अभिभावकों से संपर्क और टीकाकरण सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






