आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की साहित्यिक साधना, भारतीय संस्कृति में उनके योगदान और रामायण के शाश्वत संदेशों को स्मरण करते हुए सोमवार को नगर पालिका परिषद के सभागार में महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह एवं ‘ऋषि सम्मान’ अलंकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय संचेतना समिति एवं गुप्तकाशी विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभागाध्यक्ष डॉ0 शशांक शुक्ल को उनके साहित्यिक एवं बौद्धिक योगदान के लिए ‘ऋषि सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सहायक प्राध्यापक डॉ0 राजा पाठक रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पं0 पारस नाथ मिश्र ने की। समारोह में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए रामायण को भारतीय सभ्यता, संस्कृति, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का अनुपम ग्रंथ बताया।
रामायण भारतीय जीवन-मूल्यों की अनुपम अभिव्यक्ति –
समारोह को संबोधित करते हुए सम्मानित साहित्यकार डॉ0 शशांक शुक्ल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसे कालजयी महाकाव्य की रचना कर भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को अमूल्य धरोहर प्रदान की। संस्कृत के प्रथम महाकाव्य रामायण के रचयिता होने के कारण महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है। उनकी काव्य-साधना में भारतीय जीवन-मूल्यों, मर्यादा, सत्य और मानवीय संवेदनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। रामायण का संदेश आज भी समाज को आदर्श जीवन-पथ पर चलने की प्रेरणा देता है।
तपस्या, साधना और संकल्प के प्रतीक हैं महर्षि वाल्मीकि –
मुख्य अतिथि डॉ0 राजा पाठक ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनकी साधना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व आत्मानुशासन, धैर्य, तपस्या और अदम्य संकल्प का प्रतीक है। वाल्मीकि रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सत्य, धर्म और मानवीय आदर्शों का शाश्वत दस्तावेज है। इसकी शिक्षाएं आज भी समाज को नैतिकता, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करती हैं।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार पं. पारस नाथ मिश्र ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण सत्य, धर्म और सदाचार का शाश्वत संदेश देती है। उनका साहित्य मानवता को नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों की रही सहभागिता –
इस अवसर पर गुप्तकाशी विकास परिषद, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पं0 आलोक कुमार चतुर्वेदी, राष्ट्रीय संचेतना समिति के निदेशक जगदीश पंथी, आशुतोष ‘मुन्ना’, अनूप मिश्रा, कौसल्या देवी, अनुपमा वाणी, डॉ0 लखन राम जंगली, प्रेम मिश्रा, वीरेंद्र देव पाण्डेय, संजय शुक्ला, मनकामना शुक्ला एवं राजकुमार जालान सहित अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन भोला नाथ मिश्र ने किया।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






