Sonbhadra News : 53 हजार वोट कटने का दावा भ्रामक, एसडीएम सदर ने स्पष्ट की स्थिति

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । रॉबर्ट्सगंज विधानसभा में एसआईआर के नाम पर 53,186 वोट काटे जाने और 4,180 मतदाताओं के डुप्लीकेट होने के दावे पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 25 अक्टूबर को सपा के पूर्व सदर विधायक अविनाश कुशवाहा की प्रेस कांफ्रेंस में उठाए गए सवालों का खंडन करते हुए एसडीएम सदर आशीष कुमार त्रिपाठी ने आंकड़ों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की। प्रशासन के मुताबिक, एसआईआर के दौरान चिह्नित मतदाताओं की संख्या को सीधे वोट कटने का आंकड़ा बताना और महज नामों की समानता के आधार पर हजारों मतदाताओं को डुप्लीकेट करार देना तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना है। एसआईआर के आंकड़ों पर छिड़ी इस सियासी बहस में अब प्रशासन के स्पष्टीकरण ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

53,186 मतदाताओं को चिह्नित करने का क्या है आधार –

एसडीएम सदर आशीष कुमार त्रिपाठी के अनुसार, पूर्व विधायक द्वारा जिन 53,186 मतदाताओं का हवाला दिया जा रहा है, वे एसआईआर के दौरान एएसडीडी (ASDD) श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं से संबंधित हैं। इस श्रेणी में मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं के मामले शामिल होते हैं।

एसडीएम सदर आशीष कुमार त्रिपाठी का कहना है कि एसआईआर के दौरान रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया गया, जैसा प्रदेश की अन्य विधानसभाओं में किया गया है। ऐसे में चिह्नित मतदाताओं की संख्या को सीधे 53,186 वोट काटे जाने का दावा बताना वास्तविक स्थिति को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता। चिह्नित मतदाताओं और अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाए गए नामों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

4,180 कथित डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची पर भी सवाल –

एसडीएम सदर ने पूर्व विधायक की ओर से प्रस्तुत 4,180 कथित डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, सूची में मतदाताओं के क्रमांक, नाम और पिता या पति के नाम दर्ज हैं, लेकिन फोटोग्राफ उपलब्ध नहीं हैं। यह सूची विधानसभा क्षेत्र में समान नाम वाले मतदाताओं को एक साथ संकलित करके तैयार की गई है। प्रशासनिक पक्ष के मुताबिक, सूची में शामिल मतदाताओं के ईपीआईसी नंबर अलग-अलग हैं। उनकी तस्वीरें भी अलग-अलग हैं और वे अलग-अलग मतदान केंद्रों से संबंधित हैं। ऐसे में केवल नामों की समानता के आधार पर सभी को एक ही व्यक्ति का मतदाता घोषित करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।

वहीं एसडीएम सदर का कहना है कि मतदाता सूची में समान नाम होना और एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। दोनों के बीच अंतर किए बिना डुप्लीकेट मतदाताओं की संख्या निर्धारित करना उचित नहीं है।

एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाने से बचने की अपील –

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण कर उसमें दर्ज विवरणों का सत्यापन करना और पात्र मतदाताओं की सूची को अधिक सटीक बनाना है। ऐसे में पुनरीक्षण के दौरान चिह्नित मतदाताओं, संभावित डुप्लीकेट प्रविष्टियों और अंतिम रूप से हटाए गए नामों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।

एसडीएम सदर ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से संबंधित किसी भी दावे का आकलन आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित अभिलेखों के आधार पर किया जाना चाहिए। केवल नामों की समानता या चिह्नित मतदाताओं की संख्या के आधार पर निष्कर्ष निकालने से आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

Anand Kumar Chaubey
Author: Anand Kumar Chaubey

9 years experience in Journalism....

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