Sonbhadra News : डीएम के एक फोन ने खोल दी ‘हर घर नल’ की हकीकत, बैठाई जाँच

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । हेलो, मैं जिलाधिकारी सोनभद्र बोल रहा हूं… क्या आपके घर पर नियमित नल से जल मिल रहा है? समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जब फोन पर ग्रामीण से यह सवाल किया तो दूसरी ओर से मिला जवाब था ‘नहीं’। बस इतना सुनते ही डीएम का तेवर बदल गया। जल जीवन मिशन की फाइलों में दर्ज प्रगति और गांवों से मिल रही शिकायतों के बीच का फर्क सामने आते ही जिलाधिकारी ने जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और कड़े शब्दों में कहा कि कागजों पर ‘हर घर नल’ दिखाने से काम नहीं चलेगा, नल में नियमित पानी आना चाहिए।

कलेक्ट्रेट सभागार में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ‘हर घर को नल से जल’ योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों की रिपोर्ट सुनने के बजाय सीधे ग्रामीणों से योजना का फीडबैक लेने का फैसला किया। उन्होंने लोढ़ी, बभनौली, पसही कला, तेंदुहार, अदलगंज, लोहरा, सोनबरसा समेत विभिन्न ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों एवं ग्रामीणों को मोबाइल फोन मिलाकर पेयजल आपूर्ति की वास्तविक स्थिति जानी।

डीएम के सीधे फोन ने बैठक का पूरा रुख ही बदल दिया। कई गांवों से नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं होने की शिकायतें सामने आईं। कहीं पानी समय से नहीं मिलने की बात सामने आई तो कहीं आपूर्ति बाधित होने की शिकायत मिली। ग्रामीणों की जुबानी सामने आई स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर जिन गांवों को योजना के तहत नल कनेक्शन और पेयजल आपूर्ति से जोड़ने का दावा किया जा रहा है, वहां ग्रामीणों को नियमित पानी क्यों नहीं मिल रहा?

जवाब मिला ‘नहीं’, तो जिम्मेदारों पर गिरी गाज –

ग्रामीणों की शिकायतों को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया। पटवध समूह पेयजल योजना से संबंधित कंपनी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं संबंधित पेयजल योजना के सहायक अभियंता के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि जारी करने का निर्देश दिया।

डीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जल जीवन मिशन जैसी जनहित की योजना में किसी भी स्तर की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को नियमित एवं सुचारु पेयजल उपलब्ध कराना अधिकारियों और कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है।

दो दिन में होगी विशेष जॉच टीम गठित और पांच दिन में खुलेगी हकीकत –

जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिया कि पटवध समूह पेयजल योजना से जुड़े ग्रामों में विशेष जांच टीम गठित कराई जाए। टीम का गठन दो दिवस के भीतर करने और पांच दिवस के अंदर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में सिर्फ फाइलों और रिपोर्टों को आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि मौके पर जाकर पाइपलाइन, घरेलू कनेक्शन, पानी की उपलब्धता और आपूर्ति की नियमितता की वास्तविक स्थिति परखी जाएगी। ग्रामीणों से भी सीधे फीडबैक लिया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि योजना का लाभ वास्तव में घरों तक पहुंच रहा है या सिर्फ सरकारी आंकड़ों में दर्ज है।

डीएम का सीधा निर्देश, ‘हर घर नल’ में बहाना नहीं, चाहिए पानी –

जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाना है। योजना का लाभ पात्र ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण, जल जीवन मिशन से जुड़े कंपनी प्रतिनिधि, अधिशासी अभियंता समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

“बहरहाल आज जिलाधिकारी ने सीधे ग्रामीणों से संवाद कर ‘हर घर नल’ योजना की जमीनी हकीकत जरूर जान ली, लेकिन घरों में लगी टोटियों से पानी नहीं निकलने की शिकायतों ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के निगरानी तंत्र के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही थी तो विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी क्यों नहीं हो सकी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर योजना की वास्तविक स्थिति जानने की जरूरत नहीं समझी? यदि कागजों में सब कुछ दुरुस्त था तो जिलाधिकारी के सीधे फोन पर ग्रामीणों से शिकायतें क्यों सामने आईं? ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि ‘हर घर नल’ योजना की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी अब तक इन खामियों से अनजान कैसे रहे और ग्रामीणों को नियमित पानी उपलब्ध कराने में आखिर किस स्तर पर चूक हुई? अब जिलाधिकारी के निर्देश पर होने वाली जांच में यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। अब देखने वाली बात होगी कि जिलाधिकारी का यह सख्त रुख सूखे नलों से जल निकाल पाता है या ग्रामीणों को पानी के लिए सूखी टोटी की लंबी राह ही देखनी पड़ती है।”

 

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