आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो ने सोनभद्र के करमा विकासखंड की गुलाब आजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए कारोबार और रोजगार की नई संभावनाएं खोल दी हैं। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे शुद्ध सरसों तेल, रागी उत्पाद और शहद अब बड़े बाजार तक पहुंचने की राह पर हैं। ट्रेड शो के दौरान रोजाना मॉल के साथ हुए एमओयू के बाद इन स्थानीय उत्पादों की बिक्री और विपणन को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद जगी है।
इसी क्रम में आज गुलाब आजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात की। महिलाओं ने ट्रेड शो में रोजाना मॉल के साथ हुए समझौते की जानकारी जिलाधिकारी को दी और इस पहल को लेकर प्रसन्नता व्यक्त किया।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने समूह की महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जनपद में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रेड शो में स्वयं सहायता समूह और रोजाना मॉल के बीच हुआ एमओयू महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को यदि बड़े बाजार तक पहुंच मिले तो महिलाओं की मेहनत को उचित मूल्य मिलने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेंगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी उनकी भागीदारी बढ़ेगी।”
डीएम ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ उनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है, ताकि स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सके।
गौरतलब है कि चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में गुलाब आजीविका स्वयं सहायता समूह और रोजाना मॉल के बीच उत्पादों की बिक्री को लेकर एमओयू साइन हुआ था। इसके तहत समूह की महिलाओं द्वारा तैयार शुद्ध सरसों तेल, रागी से बने विभिन्न उत्पाद और शहद को बड़े बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
एमओयू से समूह की महिलाओं को बेहतर मार्केटिंग, व्यापक ग्राहक वर्ग और नियमित बिक्री के अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे सोनभद्र के ग्रामीण अंचल में तैयार हो रहे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ ही महिलाओं के स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है।






