आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । लेखपालों और प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध सातवें दिन भी खत्म नहीं हो सका। तहसील परिसर स्थित धरनास्थल पर आंदोलनरत लेखपालों से वार्ता कर मामले को सुलझाने के लिए एक बार फिर सदर तहसीलदार पहुंचे, लेकिन घंटों की कोशिश के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। आखिरकार तहसीलदार को बैरंग लौटना पड़ा। वहीं लेखपाल अपनी प्रमुख मांग पर अड़े हुए हैं और सदर एसडीएम आशीष कुमार त्रिपाठी के तबादले से कम पर मानने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
लगातार सात दिनों से तहसील परिसर में लेखपालों का धरना जारी है। प्रशासन की ओर से गतिरोध समाप्त कराने के लिए पहले भी वार्ता का प्रयास किया जा चुका है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसी क्रम में सोमवार को एक बार फिर सदर तहसीलदार लेखपालों के धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलन समाप्त कराने के लिए बातचीत की पहल की। हालांकि लेखपालों ने अपनी मांगों को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा, जिसके बाद वार्ता किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
एसडीएम के तबादले पर अड़े लेखपाल –
तहसील अध्यक्ष संजय कुमार सिंह और मंत्री साजिद खान वारसी का कहना है कि मौजूदा विवाद का समाधान उनकी प्रमुख मांग पूरी किए बिना संभव नहीं है। उन्होंने सदर एसडीएम आशीष कुमार त्रिपाठी के तबादले की मांग को केंद्र में रखते हुए अपना धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब तक इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त करने पर विचार नहीं किया जाएगा।
तहसील प्रशासन की ओर से लगातार बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अब तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में सातवें दिन भी धरना जारी रहने से तहसील परिसर में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
दो दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान –
खास बात यह है कि प्रशासन और लेखपालों के बीच अब तक दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन दोनों ही प्रयास बेनतीजा रहे। इसके बाद धरनास्थल पर पहुंचे सदर तहसीलदार का प्रयास भी सफल नहीं हो सका। इससे साफ है कि विवाद के समाधान के लिए प्रशासन और लेखपालों के बीच अभी लंबी बातचीत की जरूरत है।
लेखपालों के लगातार धरने के कारण तहसील स्तर पर राजस्व से जुड़े कामकाज को लेकर भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, वरासत, भूमि संबंधी मामलों के सत्यापन समेत विभिन्न कार्यों के लिए तहसील पहुंचने वाले फरियादियों को आंदोलन लंबा खिंचने की स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।





