आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । प्रदेशसरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के दावे किए जाते हैं लेकिन सड़क पर प्रसव की यह घटना उन दावों की पोल खोल कर रख दी। खासकर ऐसे जिले में जहां दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचना आज भी बड़ी चुनौती है।
मामला जनपद के बीजपुर के एनटीपीसी रिहंद परिसर स्थित ईडीसी गेट के सामने का है, जहां गुरुवार सुबह एक गर्भवती महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद करीब एक घंटे तक एंबुलेंस के लिए फोन किया जाता रहा, लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंची। आखिरकार सड़क पर ही प्रसव हो गया और बाद में एंबुलेंस पहुंचने पर जच्चा-बच्चा को धन्वंतरी अस्पताल ले जाया गया।
डोडहर निवासी अर्जुन की पत्नी रेशमा के साथ हुई इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता के साथ-साथ मौके पर मौजूद लोगों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के मुताबिक सुबह करीब आठ बजे रेशमा को लेबर पेन शुरू हुआ था। परिवार के लोग उसे लेकर ईडीसी गेट के सामने पहुंचे और एंबुलेंस के लिए लगातार संपर्क करते रहे। आरोप है कि करीब एक घंटे तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची।
सड़क पर तड़पती रही प्रसूता, लोग बनाते रहे वीडियो –
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ एंबुलेंस की देरी को लेकर नहीं, बल्कि उस दौरान मौके पर मौजूद लोगों के रवैये को लेकर भी उठ रहा है। पति अर्जुन का आरोप है कि ड्यूटी पर जा रहे कई लोग वहां से गुजरते रहे। महिला सड़क पर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन मदद के लिए आगे आने के बजाय कुछ लोग वीडियो बनाते रहे। उनका कहना है कि अधिकारी भी उसी रास्ते से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने तत्काल संज्ञान नहीं लिया बाद में एनटीपीसी के किसी व्यक्ति द्वारा संपर्क किए जाने के बाद करीब एक घंटे के इंतजार के पश्चात एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
यह तस्वीर सिर्फ व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि उस सामाजिक संवेदनशीलता पर भी कटाक्ष करती है, जहां सड़क पर एक महिला प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी और मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाय तमाशबीन बने लोग कैमरे में घटना कैद करने में ज्यादा दिलचस्पी लेते नजर आए।
महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी, फिर भी एक घंटे का इंतजार –
परिजनों के मुताबिक, ईडीसी गेट से धन्वंतरी अस्पताल की दूरी करीब एक से डेढ़ किलोमीटर है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सुबह आठ बजे से एंबुलेंस के लिए लगातार फोन किए जा रहे थे, तो इतनी कम दूरी तय करने में एंबुलेंस को करीब एक घंटे का समय क्यों लगा? हालांकि, एंबुलेंस की देरी के वास्तविक कारण और कॉल मिलने के बाद उसकी लोकेशन व रिस्पॉन्स टाइम क्या रहा, यह जांच का विषय है। इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल में 10 हजार रुपये मांगने का भी आरोप –
परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराने के बाद 10 हजार रुपये मांगने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महिला का प्रसव तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही सड़क पर हो चुका था। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही धन्वंतरी अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। एंबुलेंस से जच्चा-बच्चा को धन्वंतरी अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर बताई गई है।
मानवता पर भी उठे सवाल –
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह है कि सड़क पर एक महिला जीवन की सबसे पीड़ादायक स्थिति से गुजर रही थी और कथित तौर पर कुछ लोग मदद करने के बजाय वीडियो बनाने में लगे रहे। तकनीक के इस दौर में हर घटना को कैमरे में कैद करने की होड़ कहीं इंसानियत पर भारी तो नहीं पड़ रही कि यह सवाल इस घटना ने जरूर खड़ा कर दिया है।






