आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• हर संवेदनशील गांव में लगेंगे 100 ताड़-खजूर के पौधे
सोनभद्र । मानसून के दौरान आकाशीय बिजली का खतरा जिले के ग्रामीण इलाकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वज्रपात की घटनाओं में होने वाली जनहानि को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब जोखिम वाले गांवों में प्राकृतिक स्तर पर बचाव की पहल शुरू की है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के निर्देश पर वज्रपात संवेदनशील ग्राम पंचायतों में ताड़ और खजूर के पौधों का रोपण कराया जाएगा। प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत में न्यूनतम 100 पौधे लगाए जाने की योजना है।
प्रशासन के मुताबिक, यह पहल वज्रपात की घटनाओं से प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम कम करने के उद्देश्य से की जा रही है। शासन से प्राप्त निर्देशों और सेंसिंग सेंटर (NRSC) के विश्लेषण के आधार पर चिन्हित वज्रपात संवेदनशील क्षेत्रों में पौधरोपण की कार्यवाही प्रस्तावित की गई है।
खेतों की मेड़ों पर तैयार होगा हरित सुरक्षा क्षेत्र –
जिलाधिकारी चर्चित गोंड ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चिन्हित ग्राम पंचायतों में अनुमन्य प्रावधानों के तहत खेतों एवं फार्म की मेड़ों तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर पाम (ताड़) और खजूर की उपयुक्त प्रजातियों के पौधे लगाए जाएं।
पौधों की उपलब्धता के लिए जिला उद्यान अधिकारी से समन्वय कर ‘बरही’ और ‘सोना-100’ प्रजातियों के पौधों की व्यवस्था कराई जाएगी। खंड विकास अधिकारी और कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) पौधरोपण अभियान की निगरानी करेंगे।
पौधे लगाने के बाद संरक्षण पर भी नजर –
जिलाधिकारी चर्चित गोंड ने बताया कि अभियान केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहेगा। लगाए गए पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और रोपणोपरांत देखभाल की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। ग्राम पंचायत स्तर पर स्थल चयन से लेकर गड्ढों की खुदाई, पौधरोपण और सुरक्षा व्यवस्था तक की प्रक्रिया सुनिश्चित कराई जाएगी।
जिलाधिकारी ने जिला उद्यान विभाग और ग्राम्य विकास विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर पौधों की उपलब्धता से लेकर उनके संरक्षण तक की कार्यवाही समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित खंड विकास अधिकारियों एवं कार्यक्रम अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने को कहा गया है।
वज्रपात से होने वाली जनहानि रोकना बड़ी चुनौती –
सोनांचल में बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। खुले खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और ग्रामीण अक्सर वज्रपात की चपेट में आते हैं। ऐसे में संवेदनशील गांवों में जोखिम कम करने के लिए प्रशासन की ओर से किए जा रहे उपाय महत्वपूर्ण हैं।
पौधरोपण के साथ ग्रामीणों को वज्रपात से बचाव के प्रति जागरूक करना और मौसम संबंधी चेतावनियों का समय पर प्रसार भी जरूरी होगा। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम न्यूनीकरण के साथ हरित आवरण को बढ़ावा देना है।






