आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिस सोनभद्र की पहचान अब तक बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में रही है, आने वाले वर्षों में वही जिला डिजिटल दुनिया के सबसे अहम बुनियादी ढांचे का ठिकाना बन सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच दुनिया में डाटा की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सोनभद्र में बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जिले में दो स्थानों पर 100-100 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। शासन स्तर से जल्द ही टीम भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा।
एआई के दौर में बढ़ेगी डाटा सेंटरों की जरूरत –
मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा से लेकर डिजिटल सेवाओं तक हर क्षेत्र में डाटा का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। एआई आधारित तकनीकों के विस्तार ने इस जरूरत को और कई गुना बढ़ा दिया है। ऐसे में आने वाला दशक डाटा सेंटरों के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वर्तमान में दुनिया में डाटा सेंटरों की कुल क्षमता करीब 124 गीगावाट है। इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 170 से 300 गीगावाट तक किए जाने की तैयारी है। भारत भी इस वैश्विक विस्तार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश में वर्तमान में करीब 1.7 गीगावाट डाटा सेंटर क्षमता है, जिसे 2030 तक 13 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश में चार-पांच बड़े समूह विकसित करने की तैयारी –
इस महत्वाकांक्षी विस्तार में उत्तर प्रदेश की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश में चार से पांच बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। पहले चरण में मीरजापुर और सोनभद्र को इसके लिए चुना गया है।
जनपद में ओबरा तहसील के कोटा और दुद्धी तहसील के आरंगपानी में 100-100 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। दोनों स्थानों पर जमीन की उपलब्धता, बिजली, पानी, संपर्क मार्ग समेत अन्य जरूरी सुविधाओं का शासन की टीम स्थलीय निरीक्षण के दौरान आकलन करेगी। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
जरूरत बढ़ी तो 400 एकड़ तक हो सकता है विस्तार –
भविष्य में एआई के लिए डाटा की जरूरत बढ़ने की संभावना को देखते हुए केवल एक-दो छोटे केंद्रों के बजाय बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की योजना है। इन केंद्रों में भारी मात्रा में डाटा का भंडारण, प्रसंस्करण और आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
फिलहाल दोनों स्थानों पर 100-100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी है। परियोजना के विस्तार और भविष्य की जरूरत के अनुसार भूमि का दायरा 300 से 400 एकड़ तक बढ़ाया जा सकता है।
बिजली-पानी और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी बनेगी ताकत –
डाटा सेंटर के लिए सिर्फ जमीन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके संचालन के लिए लगातार बिजली आपूर्ति, पर्याप्त पानी और बेहतर कनेक्टिविटी बेहद जरूरी होती है। सोनभद्र में बड़े विद्युत उत्पादन केंद्रों के साथ औद्योगिक गतिविधियों का मजबूत आधार पहले से मौजूद है।
प्रस्तावित क्षेत्रों के आसपास से विंध्य एक्सप्रेसवे के गुजरने की योजना भी कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में डाटा सेंटर परियोजना के साथ आसपास सड़क, आवास, बाजार और अन्य सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की संभावना है। इससे वर्तमान औद्योगिक नगरों की तर्ज पर नए शहरी क्षेत्र विकसित होने की उम्मीद है।
पांच हजार तक युवाओं को मिल सकता है प्रत्यक्ष रोजगार –
डाटा सेंटरों के निर्माण और संचालन से सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत, नेटवर्क संचालन, सुरक्षा और रखरखाव समेत कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक एक बड़े डाटा सेंटर से पांच हजार तक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा परिवहन, निर्माण, खानपान, आवास और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बीसीजी को बनाया गया परामर्शदाता –
प्रदेश के नियोजन विभाग की पहल पर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) को परियोजना के लिए परामर्शदाता के रूप में जोड़ा गया है। शासन स्तर पर प्रस्तावित डाटा सेंटर समूहों के लिए जमीन और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता का परीक्षण किया जा रहा है।
डीएम बोले- स्थलीय निरीक्षण के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि “एआई और डिजिटल प्लेटफार्म के बढ़ते उपयोग के कारण डाटा सेंटर की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। इसी क्रम में शासन स्तर से सोनभद्र में डाटा सेंटर स्थापित करने की पहल की गई है। कोटा और आरंगपानी में भूमि चिन्हित की गई है। जल्द ही शासन की टीम दोनों स्थानों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।”





