आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जंगल-पहाड़ों की धरती सोनभद्र में मंगलवार को जनजातीय संस्कृति और लोक परंपरा का ऐसा रंग देखने को मिला, जिसमें आस्था, उमंग और अपनी जड़ों से जुड़ाव का अद्भुत संगम नजर आया। ओबरा के पनारी ग्राम पंचायत के मंैराडाड़ में आयोजित जनजाति संस्कृति महोत्सव एवं करमा पूजा में मांदर की गूंज, करमा गीतों की मधुर धुन और पारंपरिक लोकनृत्यों ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शक भी झूमते नजर आए।
सेवा समर्पण संस्थान से संबद्ध अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की ओर से आयोजित महोत्सव में बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गौड़, जिलाधिकारी चर्चित गौड़, कैमूर वन्यजीव प्रभाग की प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी आरुषि मिश्रा, ब्लॉक प्रमुख चोपन लीला गौड़, ब्लॉक प्रमुख म्योरपुर मान सिंह गोंड समेत अन्य अतिथियों ने सहभागिता की।
15 बैगा पुजारियों ने विधि-विधान से कराया करमा पूजन –
कार्यक्रम का शुभारंभ 15 बैगा पुजारियों द्वारा करम डाड़ लाकर विधि-विधान से करमा देवता की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। अतिथियों ने भी करमा देवता के समक्ष पूजा-अर्चना कर जनजातीय समाज की आस्था और परंपरा को नमन किया। पूजा के बाद शुरू हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम देखते ही देखते आकर्षण का केंद्र बन गया। करीब 20 जनजातीय टीमों ने क्रमवार करमा गीत, सैलानी, डोमचकित सहित विभिन्न पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्य और नृत्य की थिरकन ने जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।
मांदर पर थाप लगाकर मंत्री और डीएम ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गौड़ और जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने स्वयं मांदर पर थाप लगाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। मंच से उतरकर अतिथियों की इस सहभागिता ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया।
जनजातीय समाज के लोगों ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए उन्हें पलास के पत्तों से बनी टोपी पहनाकर सम्मानित किया।
करमा महोत्सव हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा की पहचान – संजीव गौड़
समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गौड़ ने कहा कि करमा महोत्सव जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, आस्था और परंपराओं की पहचान है। यह केवल पूजा और उत्सव का आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि करमा महोत्सव के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास सराहनीय है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में नशामुक्ति और शिक्षा का संदेश भी दिया गया, जो समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
नशे से दूर रहें, बच्चों को शिक्षा से जोड़ें – डीएम
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनजातीय समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि करमा महोत्सव के अवसर पर नशे से दूर रहने का संकल्प लें और अपने बच्चों को शिक्षा से जरूर जोड़ें। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा ही उनके उज्ज्वल भविष्य और समाज की मजबूत नींव तैयार कर सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी गंभीरता से कार्य कर रहा है।
DMF से विद्यालयों की बदलेगी तस्वीर –
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) से आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। विद्यालयों में भवन, अतिरिक्त कक्ष और अन्य मूलभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति को संरक्षित करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी समाज के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर देना भी है।
करमा पूजा आयोजन नहीं, घर-घर की परंपरा बने : आनंद जी
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड एवं नेपाल राष्ट्र के मुख्य अतिथि आनंद जी ने कहा कि आज करमा महोत्सव में जनजातीय समाज की जिस एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का दृश्य देखने को मिला, वह उत्साह बढ़ाने वाला है।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में युवा पश्चिमी संस्कृति की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे समय में अपनी लोक संस्कृति, पूजा पद्धति और परंपराओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि करमा पूजा केवल एक आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि आने वाले समय में घर-घर और जन-जन की पूजा पद्धति का हिस्सा बने, यही प्रयास होना चाहिए।
आस्था, संस्कृति और एकजुटता का दिखा संगम –
महोत्सव के दौरान पूरा पनारी क्षेत्र जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। एक ओर करमा देवता की पूजा में आस्था का भाव दिखाई दिया तो दूसरी ओर पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को और भव्य बना दिया।
कार्यक्रम में सेवा समर्पण संस्थान के जिलाध्यक्ष जेसी बिमल, रविंद्र सिंह, शिवम मिश्रा, मुन्ना धांगर, हीरेश द्विवेदी, प्रवीण शुक्ल समेत संगठन के पदाधिकारी, क्षेत्रीय नागरिक, पत्रकार, पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग मौजूद रहे।





