आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । महंगाई की आग अब सीधे रसोई तक पहुंच गई है। पहले सब्जियों ने थाली का बजट बिगाड़ा और अब दाल-तेल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का हिसाब-किताब ही उलट दिया है। जरूरी खाद्य वस्तुओं के लगातार महंगे होने से घर का मासिक बजट सिकुड़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि बाजार से खाली हाथ लौटना मुश्किल है और जरूरत का सामान खरीदने पर जेब तेजी से हल्की हो रही है।
22 अगस्त से 22 सितंबर के तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो चना दाल 80 से बढ़कर 85 रुपये और अरहर दाल 120 से बढ़कर 125 रुपये किलो हो गई। उड़द दाल में करीब तीन रुपये, जबकि मसूर और मूंग दाल में पांच-पांच रुपये किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यानी जिस दाल को आम परिवार रोज की थाली में शामिल करता है, वही अब बजट पर लगातार दबाव बढ़ा रही है।
दाल महंगी, तेल भी गरम आखिर कैसे चलेगी रसोई –
दाल के बाद खाद्य तेल ने भी जेब पर चोट तेज कर दी है। पैक्ड सरसों तेल करीब 190 से 195 रुपये किलो, रिफाइंड 150 से 155 रुपये और वनस्पति तेल 160 से 165 रुपये किलो पहुंच गया है। तेल की कीमत में मामूली दिखने वाली यह बढ़ोतरी महीने भर की खरीदारी में बड़ा अंतर पैदा कर रही है।
रसोई में दाल हो या सब्जी, तेल के बिना काम चलना मुश्किल है। लिहाजा कीमत बढ़ने का सीधा असर हर दिन की थाली पर पड़ रहा है। दूसरी तरफ सब्जियों के दाम भी राहत देने के मूड में नहीं हैं। लहसुन 200 से 250 रुपये किलो और प्याज करीब 50 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। हरी सब्जियों के भाव भी कई जगह 50 रुपये किलो के आस-पास या उससे ऊपर बने हुए हैं।
थाली से स्वाद गायब, महंगाई का हिसाब बेहिसाब –
महंगाई का असर सिर्फ बाजार की दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर घर की रसोई पर दिखाई दे रहा है। महीने की शुरुआत में बनाया गया राशन का बजट महीने के अंत तक पहुंचते-पहुंचते गड़बड़ा जा रहा है। दाल की मात्रा घटाने से लेकर तेल का इस्तेमाल सीमित करने तक, गृहस्थी चलाने के लिए परिवारों को खर्च में लगातार कटौती करनी पड़ रही है।
एक तरफ आमदनी की अपनी सीमाएं हैं, दूसरी तरफ रोजमर्रा की जरूरतों के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मध्यम और निम्न आय वाले परिवार अपना घर का बजट कितनी दूर तक खींच पाएंगे?
त्योहार सिर पर, और गहराया महंगाई का डर –
नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार सामने हैं। इन दिनों घरों में खाद्य सामग्री की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में अगर दाल, तेल और सब्जियों की कीमतों में तेजी जारी रही तो त्योहारों का खर्च परिवारों के लिए और भारी पड़ सकता है।
कारोबारियों श्रीजन मिश्रा, अशोक कुमार, संजय और रोहित का कहना है कि दाल और खाद्य तेल के भाव में तेजी बनी हुई है। त्योहारों में मांग बढ़ने से बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि आगे की कीमतें आवक और मांग की स्थिति पर निर्भर करेंगी।
रसोई का बजट संभालना मुश्किल –
सपा महिला सभा जिलाध्यक्ष गीता गौर ने कहा कि “महंगाई का सबसे सीधा असर महिलाओं की रसोई पर पड़ता है। दाल, तेल और सब्जी जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें लगातार महंगी हो रही हैं। त्योहारों से पहले यदि कीमतों में और बढ़ोतरी हुई तो आम परिवारों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी होनी चाहिए।”
महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष उषा चौबे ने कहा कि “महंगाई ने आम परिवारों की कमर पर दबाव बढ़ा दिया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें ही महंगी होती जा रही हैं। सरकार और संबंधित विभागों को बाजार की नियमित निगरानी कर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।”
गृहणियों की जुबानी- हर खरीदारी में कट रही जेब
गृहणी रेखा देवी कहती हैं कि “पहले सब्जियों के दाम बढ़े और अब दाल-तेल भी महंगा हो गया। महीने का राशन बजट तय करने के बाद भी सामान पूरा नहीं पड़ता। त्योहारों के खर्च को लेकर अभी से चिंता होने लगी है।”
गृहणी सीमा सिंह का कहना है कि “दाल और तेल ऐसी चीजें हैं जिन्हें घर में कम करके भी पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। हर महीने राशन खरीदते समय पिछले महीने से ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है। अगर इसी तरह दाम बढ़ते रहे तो घर का बजट संभालना और मुश्किल होगा।”






