Sonbhadra News : राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में डिबरी युग में जी रहे आदिवासी, प्रदर्शन कर एक्सईएन को सौंपा ज्ञापन

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य जनपद को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने इसे आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल किया, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और जीवन स्तर के मोर्चे पर पिछड़े क्षेत्रों में तेजी से बदलाव लाया जा सके। नीति आयोग के अनुसार आकांक्षी जिला कार्यक्रम का मकसद देश के अपेक्षाकृत कम विकसित जिलों में परिणाम आधारित विकास को गति देना है लेकिन जमीनी तस्वीर कई जगह अब भी सरकारी दावों से अलग दिखाई देती है। जुगैल क्षेत्र के कई आदिवासी टोले आज भी बिजली की रोशनी का इंतजार कर रहे हैं।

बगड़ेवा, पुषरेव, सलैयापान, गर्दा-गर्दी, घोड़ा घाट, कसनार समेत कई टोलों के ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के करीब आठ दशक बीतने के बाद भी उनके घरों तक बिजली नहीं पहुंची है। कई स्थानों पर तो बिजली के पोल और तार तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में बिजली कनेक्शन की बात भी ग्रामीणों को दूर की कौड़ी नजर आती है।

यह स्थिति उस जनपद की है जिसे आकांक्षी जिला कार्यक्रम के जरिए विकास की दौड़ में आगे लाने का लक्ष्य रखा गया है। नीति आयोग के दस्तावेजों में सोनभद्र को आकांक्षी जिलों में शामिल किया गया है और कार्यक्रम में बुनियादी ढांचे को प्रमुख विकास क्षेत्र माना गया है।

इसी से नाराज जुगैल क्षेत्र के ग्रामीणों ने युवा नेता राहुल पांडेय के नेतृत्व में आज बिजली विभाग पर प्रदर्शन करते हुए अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपा और चेताया कि यदि 20 अक्टूबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह 21 अक्टूबर से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

कागज पर विकास की रफ्तार, गांवों में अब भी डिबरी का सहारा –

युवा नेता राहुल पांडेय का कहना है कि “बिजली नहीं होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शाम ढलते ही गांवों में अंधेरा पसर जाता है और बच्चों को डिबरी या अन्य वैकल्पिक साधनों के सहारे पढ़ाई करनी पड़ती है। रात के समय आवागमन और सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनी रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश आधुनिक तकनीक और विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने की बात कर रहा है, तब जुगैल के इन टोलों में रहने वाले परिवार बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी कब तक इंतजार करते रहेंगे?”

दो बार विधायक चुने गए संजीव गोंड, फिर भी बिजली का इंतजार –

जुगैल क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर भी इस सवाल को और महत्वपूर्ण बना देती है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र की जनता ने संजीव गोंड को दो बार अपना विधायक चुना और पिछले 10 वर्षों से वह लगातार प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री हैं। इसके बावजूद जुगैल क्षेत्र के कई आदिवासी टोले बिजली की सुविधा से वंचित होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की ओर से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला जनप्रतिनिधि लगातार दो बार जनता का विश्वास हासिल कर चुका है और प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, तो जुगैल के इन दूरस्थ टोलों तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं पहुंच सकी? हालांकि बिजली व्यवस्था पूरी तरह संबंधित विभाग और शासन की योजनाओं एवं क्रियान्वयन से जुड़ा विषय है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से वे अपनी समस्याओं को शासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और समाधान कराने की उम्मीद करते हैं।

पोल नहीं तो कनेक्शन कैसे –

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के मुख्य अधिशासी अभियंता को ज्ञापन देकर प्रभावित टोलों का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जहां पोल नहीं हैं वहां पोल लगाए जाएं, आवश्यक तार एवं विद्युत ढांचा तैयार किया जाए और पात्र परिवारों को कनेक्शन दिया जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण करे और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर ग्रामीणों को बताया जाए कि आखिर उनके गांव में बिजली कब पहुंचेगी।

ये रहे मौजूद –

इस दौरान हीरामणि, जयप्रकाश, रघुवीर, उमाशंकर, अनिल कुमार, भैरो सिंह, शिवरतन, रमेश, अमृतलाल, संतोष, लालता सिंह, रामविलास, गेंनालाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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