आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । अब परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के हाथों में सिर्फ किताबें ही नहीं, शतरंज की बिसात भी नजर आएगी। बच्चों की एकाग्रता, तार्किक क्षमता, धैर्य और सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता को परखने और निखारने के लिए जिले में शतरंज प्रतियोगिता की शुरुआत होने जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने प्रतियोगिता का कैलेंडर जारी कर दिया है। विद्यालय स्तर से शुरू होने वाली यह प्रतियोगिता संकुल और ब्लॉक स्तर से होते हुए जनपद स्तर तक पहुंचेगी।
प्रतियोगिता में कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों को समूह-ए तथा कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को समूह-बी में शामिल किया गया है। विभाग की कोशिश प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर परिषदीय विद्यालयों में शतरंज को नियमित खेल गतिविधि के तौर पर विकसित करने की है। इसके माध्यम से विद्यालयों में छिपी शतरंज प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।
21 अक्टूबर तक प्रशिक्षण और अभ्यास अभियान का हुआ आगाज –
1 अक्तूबर से प्रशिक्षण और अभ्यास अभियान का हुआ आगाज हुआ है जो 21 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को भी शतरंज के नियम, मोहरों की चाल, तकनीक और रणनीति की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद 24 अक्टूबर को विद्यालय स्तर, 28 अक्टूबर को संकुल स्तर और 31 अक्टूबर को ब्लॉक स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित होगी।
वहीं एक से 13 नवंबर तक जनपद स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारियां पूरी की जाएंगी और 14 नवंबर, बाल दिवस के अवसर पर जनपद स्तरीय ग्रैंड फिनाले प्रस्तावित है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पांडेय ने बताया कि “प्रतियोगिता का कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके लिए नो-बैग डे यानी शनिवार और विशेष दिवसों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि शतरंज के नियमित अभ्यास से बच्चों में समस्या समाधान, रणनीति बनाने, परिस्थितियों का आकलन करने और संभावित परिणामों पर विचार कर निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो नहीं सकती है। हार-जीत के अनुभव से खेल भावना, धैर्य और आत्मनियंत्रण को भी बढ़ावा मिलेगा।”





