आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• 30 सितंबर की डेडलाइन, पूर्ति विभाग के पास ही नहीं आंकड़ा कि कितने उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी हुई पूरी
• 1040 के सिलेंडर के लिए 2112 रुपये देने की नौबत आई तो कौन होगा जिम्मेदार?
सोनभद्र । त्योहारी सीजन में जब आम आदमी पहले से ही बढ़ते खर्च से जूझ रहा है, ऐसे में घरेलू गैस उपभोक्ताओं के सामने एक और बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। वहीं सूत्रों की मानें तो जिले में 70 प्रतिशत घरेलू गैस उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी अब तक पूरी नहीं होने की बात सामने आ रही है। 30 सितंबर तक ई-केवाईसी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को अगले महीने घरेलू सिलेंडर सब्सिडी वाले घरेलू रेट के बजाय कॉमर्शियल दर पर मिलने की आशंका जताई जा रही है।
यदि 1040 रुपये के आसपास मिलने वाला घरेलू सिलेंडर 2112 रुपये में खरीदना पड़ा तो उपभोक्ता को एक सिलेंडर पर करीब 1072 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। त्योहारों के बीच रसोई के बजट पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी साबित हो सकता है।
70 प्रतिशत उपभोक्ताओं पर मंडराया संकट के बादल, विभाग के पास आंकड़ा तक नहीं –
सबसे बड़ा सवाल पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर खड़ा हो रहा है। जिले में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के तीन लाख से अधिक घरेलू गैस उपभोक्ता हैं, लेकिन इनमें से कितने उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी पूरी हुई और कितने अभी बाकी हैं, इसका स्पष्ट आंकड़ा विभागीय स्तर पर उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है।
जब अंतिम तारीख सिर पर है और उपभोक्ताओं की जेब पर हजारों रुपये का असर पड़ सकता है, तो विभाग के पास अपने ही जिले के उपभोक्ताओं की अद्यतन स्थिति क्यों नहीं है? क्या उपभोक्ताओं को समय रहते पर्याप्त जानकारी और सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह गैस एजेंसियों के भरोसे छोड़ दी गई है?
डेडलाइन नजदीक, जागरूकता अभियान कितना असरदार –
30 सितंबर की समयसीमा बेहद नजदीक है। ऐसे में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, जिन्हें ई-केवाईसी की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है या गैस एजेंसी तक पहुंचने में परेशानी होती है।
यदि ई-केवाईसी अनिवार्य है तो पूर्ति विभाग को इस आंकड़े को सार्वजनिक करने के साथ यह भी बताना चाहिए कि कितने उपभोक्ताओं ने प्रक्रिया पूरी कर ली है और कितने अभी लंबित हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर लंबित ई-केवाईसी पूरी कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
लिखित आदेश कहां है, पहले यह भी स्पष्ट करे विभाग –
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-केवाईसी नहीं कराने पर घरेलू सिलेंडर को कॉमर्शियल दर पर देने की बात कही जा रही है, लेकिन इसके लिए लिखित आदेश की स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरे जिले की रिपोर्टिंग में भी जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा है कि कॉमर्शियल दर पर सिलेंडर देने की बात कही जा रही है, लेकिन उनके पास इसका लिखित आदेश नहीं है।
ऐसे में जिले के उपभोक्ताओं के बीच पैदा हो रहे भ्रम को दूर करना पूर्ति विभाग की जिम्मेदारी बनती है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि 30 सितंबर के बाद वास्तव में क्या व्यवस्था लागू होगी और उपभोक्ताओं को किस दर पर सिलेंडर मिलेगा।
त्योहारी सीजन में हजारों का अतिरिक्त बोझ पड़ा तो किसकी होगी जिम्मेदारी –
त्योहारों से ठीक पहले यदि उपभोक्ताओं को घरेलू गैस के लिए सामान्य दर से दोगुने से भी अधिक राशि चुकानी पड़ी तो इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ेगा। ऐसे में सवाल केवल ई-केवाईसी का नहीं, बल्कि समय रहते उपभोक्ताओं को सूचना, सुविधा और स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराने का भी है।






