आरटीई के तहत चयनित बच्चों का निजी स्कूलों में शत-प्रतिशत दाखिला कराएं सुनिश्चित, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई: DM 

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सोनभद्र। निःशुल्क एवं बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) 2009 के अंतर्गत अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के चयनित बच्चों को गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन दिलाने को लेकर जिला प्रशासन बेहद गंभीर है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा-1 तथा पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों के दाखिले की समीक्षा, यूनिफॉर्म व पाठ्य पुस्तकों हेतु सहायता राशि और विद्यालयों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में निजी विद्यालयों के प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों के साथ स्कूलों में पूर्ण रूप से समानता का व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर भेदभाव या असमानता की शिकायत मिलने पर संबंधित विद्यालय के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम विकास खंड चतरा में चयनित बच्चों के नामांकन की स्थिति जानी, जिस पर खंड शिक्षा अधिकारी ने अवगत कराया कि चतरा ब्लॉक में कुल 92 बच्चों का प्रवेश होना था, जिसमें से 79 बच्चों का दाखिला हो चुका है और 13 बच्चों ने विभिन्न कारणों से प्रवेश नहीं लिया है। इस पर जिलाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके से ही चतरा ब्लॉक की दो बालिकाओं, अनन्या मौर्या और प्रिया मौर्या के अभिभावकों से खुद मोबाइल फोन के माध्यम से सीधा संवाद किया। उन्होंने अभिभावकों से पूछा कि आपने आरटीई एक्ट के तहत अपने बच्चे का प्रवेश संगम एकेडमी में क्यों नहीं कराया? अभिभावक द्वारा बताया गया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा परिवहन चार्ज (वेन शुल्क) अत्यधिक मांगे जाने के कारण वे बच्चे का दाखिला कराने में असमर्थ रहे। इसी प्रकार, जिलाधिकारी ने विकास खंड रॉबर्ट्सगंज की समीक्षा की, जहां खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ब्लॉक में निर्धारित 665 बच्चों के सापेक्ष 566 बच्चों का प्रवेश कराया जा चुका है, जबकि 99 बच्चे अभी शेष हैं। जिलाधिकारी ने यहाँ की छात्रा आरूषी पटेल के अभिभावक से भी फोन पर वार्ता कर प्रवेश न लेने के कारणों की पड़ताल की। उन्होंने मौके पर उपस्थित प्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे ऐसे गरीब व शोषित वर्ग के बच्चों का दाखिला प्राथमिकता पर करें और परिवहन जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान निकालें।

जिलाधिकारी ने जनपद के समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विकास खंडों में संचालित निजी स्कूलों के प्रबंधकों से तत्काल समन्वय स्थापित करें। सत्र 2026-27 के लिए लॉटरी में चयनित सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन आगामी तीन दिनों के भीतर पूर्ण कराते हुए पोर्टल पर फीडिंग की कार्रवाई पूरी की जाए। इसके साथ ही, नामांकन पूरा होते ही संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी नव-प्रवेशित और पूर्व से अध्ययनरत बच्चों का भौतिक सत्यापन एक सप्ताह के अंदर अनिवार्य रूप से कर लें। उन्होंने बताया कि बच्चों को यूनिफॉर्म व पाठ्य पुस्तकों हेतु सहायता राशि और निजी विद्यालयों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति की वित्तीय सहायता के लिए शासन से बजट का आवंटन प्राप्त हो चुका है। जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) को निर्देशित किया कि जैसे ही विकास खंडों से सत्यापन आख्या प्राप्त हो, उसके एक सप्ताह के भीतर बच्चों और विद्यालयों को देय धनराशि नियमानुसार उनके खातों में प्रेषित कर उपभोग प्रमाण पत्र शासन को भेज दिया जाए।

बैठक के अंत में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पाण्डेय ने तकनीकी और डिजिटल डेटा अपडेशन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने समस्त विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया कि स्कूलों में पढ़ रहे सभी बच्चों की अपार आईडी (APAAR ID), फैमिली आईडी का अंकन, यू-डायस (U-DISE) पोर्टल पर प्रोग्रेशन एक्टिविटी को समय से पूरा करना और नए छात्रों का विवरण पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य है, इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पाण्डेय, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा अजय यादव, जिला आरटीई प्रभारी विवेक कुमार तिवारी सहित भारी संख्या में निजी विद्यालयों के प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।

Harsh Vardhan
Author: Harsh Vardhan

9 years experience in the field of journalism.

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