आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में नवजात बच्चों के लावारिस हालत में मिलने की घटनाएं कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक माह पहले दुद्धी में सड़क किनारे मिली नवजात बच्ची को जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने स्वयं संरक्षण की जिम्मेदारी लेते हुए उसका नाम ‘कीर्ति’ रखा था। बच्ची को सुरक्षित भविष्य और नया परिवार दिलाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसी बीच रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र के रौप-सहिजन खुर्द में धान के खेत में एक और नवजात मिलने की घटना सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। आखिर नवजात बच्चों को इस तरह असुरक्षित परिस्थितियों में छोड़ने की नौबत क्यों आ रही है? क्या गर्भवती महिलाओं और प्रसव संबंधी गतिविधियों की निगरानी में कहीं कोई कमी है? या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए अब मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है। जिलाधिकारी को पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित करनी चाहिए, ताकि घटना के कारणों का पता चल सके और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
एक तरफ ‘कीर्ति’ के सुरक्षित भविष्य की चिंता, दूसरी तरफ खेत में मिला नवजात –
दुद्धी में सड़क किनारे मिली बच्ची को जिलाधिकारी द्वारा ‘कीर्ति’ नाम देकर उसके संरक्षण और नए परिवार में भेजने की दिशा में प्रयास करना प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण है। ऐसे में जिले में दोबारा नवजात के असुरक्षित हालत में मिलने की घटना महज संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं की जा सकती। दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है, ऐसा फिलहाल कहने का आधार नहीं है, लेकिन इनके सामने आने से नवजातों की सुरक्षा, गर्भवती महिलाओं की निगरानी और बाल संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता की समीक्षा जरूरी हो गई है।
सवाल यह भी है कि क्या संबंधित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण हो रहा है? क्या प्रसव पूर्व देखभाल की व्यवस्था प्रभावी है? क्या घरों में होने वाले प्रसव और अपंजीकृत अस्पतालों में संचालित प्रसव संबंधी गतिविधियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच रही है? इन बिंदुओं पर विभागीय स्तर से पड़ताल होने पर ही निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
धान के खेत में नग्न अवस्था में मिला नवजात –
ताजा मामला रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर चार स्थित रौप-सहिजन खुर्द मोहल्ले का है। चंद्रिका माता मंदिर से करीब 100 मीटर दूर धान के खेत में रात के समय नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर बाहर निकले एक युवक ने खेत में नग्न अवस्था में नवजात को पड़ा देखा। इसके बाद उसने अपने परिजनों, नगर पालिका सभासद राकेश भारती और ग्रामीणों को सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए नवजात को खेत से उठाकर पास स्थित सरकारी एएनएम सेंटर पहुंचाया। इसके बाद चुर्क चौकी, लोढ़ी चौकी और डायल 112 पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने नवजात को अपने संरक्षण में लेकर बाल संरक्षण टीम को सूचित किया।
बाद में बाल संरक्षण टीम के वरिष्ठ सहायक राजेश सिंह और चाइल्ड हेल्पलाइन के अनिल यादव को नवजात सौंप दिया गया। टीम नवजात को जिला अस्पताल स्थित वन स्टॉप सेंटर ले जाकर चिकित्सकीय जांच कराने की प्रक्रिया अपनाएगी। इसके बाद बाल संरक्षण विभाग नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करेगा।
घरों और अपंजीकृत अस्पतालों में प्रसव की निगरानी पर भी उठे सवाल –
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, प्रसव पूर्व जांच और सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए आशा कार्यकर्ताओं तथा एएनएम के माध्यम से निगरानी करता है। इसके बावजूद यदि कोई प्रसव विभागीय जानकारी से बाहर रह जाता है, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित स्तर पर निगरानी में कहां कमी रह गई।
विशेष रूप से अपंजीकृत अस्पतालों में प्रसव की आशंकाओं और घरों में होने वाले ऐसे प्रसवों पर ध्यान देना जरूरी है, जिनकी जानकारी स्वास्थ्य तंत्र तक नहीं पहुंचती। हालांकि, रौप-सहिजन खुर्द में मिले नवजात का जन्म कहां और किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी अस्पताल या व्यक्ति की भूमिका को जांच से पहले जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
स्वास्थ्य विभाग को संबंधित क्षेत्र में हाल के प्रसवों से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों की नियमानुसार समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही, यदि किसी अपंजीकृत संस्थान में प्रसव कराए जाने की जानकारी मिलती है, तो उसकी वैधानिक स्थिति और संबंधित तथ्यों की जांच की जानी चाहिए। इससे न केवल वर्तमान मामले की पड़ताल में मदद मिलेगी, बल्कि निगरानी व्यवस्था की खामियों की पहचान भी हो सकेगी।
डीएम के हस्तक्षेप से खुल सकते हैं कई सवालों के जवाब –
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी से अपेक्षा है कि वह स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और बाल संरक्षण विभाग की संयुक्त टीम गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराएं। जांच में नवजात को खेत में छोड़ने की परिस्थितियों, उसके जन्म से संबंधित उपलब्ध तथ्यों और किसी स्तर पर लापरवाही की आशंका की पड़ताल की जा सकती है। यदि जांच में किसी की भूमिका या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दुद्धी में मिली ‘कीर्ति’ के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रशासनिक प्रयासों के बीच रौप-सहिजन खुर्द की घटना ने नवजातों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे मामलों में केवल बच्चे को संरक्षण में लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों का पता लगाना भी जरूरी है, जिनमें नवजात असुरक्षित अवस्था में मिला।
“बहरहाल धान के खेत में मिले नवजात का सुरक्षित संरक्षण तत्काल प्राथमिकता है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी जरूरी है कि उसे इस हालत में किसने और क्यों छोड़ा। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से गठित संयुक्त जांच टीम न केवल घटना की वास्तविक वजह सामने ला सकती है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और बाल संरक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए भी जरूरी कदम सुझा सकती है।”
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





