डिजिटल लेनदेन में यूपी ने तोड़ा रिकॉर्ड, UPI सबसे लोकप्रिय; करीब 1566 करोड़ के ट्रांजैक्शन हुए

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UP: उत्तर प्रदेश में डिजिटल भुगतान का विस्तार तेजी से हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर (9 महीने) के दौरान प्रदेश में कुल 1635.72 करोड़ डिजिटल लेनदेन दर्ज किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह स्पष्ट संकेत है कि लोग तेजी से नकद लेनदेन से डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रहे हैं।

बैंकिंग रिपोर्ट के अनुसार, लेनदेन की संख्या के आधार पर यूपीआई (भीम/यूपीआई) सबसे लोकप्रिय माध्यम बनकर उभरा है। कुल लेनदेन में लगभग 1566 करोड़ ट्रांजेक्शन यूपीआई और क्यूआर कोड के जरिये हुए। इससे स्पष्ट है कि छोटे भुगतान से लेकर रोजमर्रा के खर्चों तक में यूपीआई का व्यापक उपयोग हो रहा है। वहीं, लेनदेन की कुल राशि (वैल्यू) के हिसाब से आईएमपीएस (तत्काल भुगतान सेवा) सबसे आगे रहा। बड़े भुगतान और त्वरित बैंक ट्रांसफर के लिए लोगों ने इस माध्यम को प्राथमिकता दी।

कार्ड आधारित भुगतान की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही

इस अवधि में क्रेडिट और डेबिट कार्ड का उपयोग भी बढ़ा है। इन माध्यमों से करीब 1.09 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए, जो दर्शाता है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्ड आधारित भुगतान की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बैंकों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और क्यूआर कोड जैसी सेवाओं का तेजी से विस्तार किया है।

दो हिस्सों में बंटी बैंकिंग प्रणाली

आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग प्रणाली दो हिस्सों में बंटी नजर आती है। यूपीआई जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर पब्लिक सेक्टर बैंकों की पकड़ मजबूत है, क्योंकि इनका नेटवर्क गांव से शहर तक फैला है और ग्राहक आधार बड़ा है। वहीं, प्राइवेट सेक्टर बैंक तकनीक आधारित सेवाओं जैसे आईएमपीएस, भारत क्यूआर और कार्ड भुगतान में आगे हैं। इसकी प्रमुख वजह बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज सेवाएं और शहरी ग्राहकों पर मजबूत पकड़ है।

यूनियन बैंक के महाप्रबंधक राजेश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग और बैंकों के अथक प्रयास का परिणाम है कि डिजिटल लेनदेन में यूपी सबसे आगे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पब्लिक सेक्टर बैंकों का गांव-कस्बों तक फैला नेटवर्क है। आरबीआई और सरकार के साथ लगातार वित्तीय जागरूकता अभियानों का भी इसमें योगदान है।

वर्षों के अनुसार डिजिटल लेनदेन (करोड़ में)

2018-19: 161.69

2019-20: 189.07

2020-21: 391.02

2021-22: 426.68

2022-23: 1174.32

2023-24: 893.98

2024-25: 1380.91

2025-26 (दिसंबर तक): 1635.72

इन आंकड़ों से साफ है कि डिजिटल भुगतान अब आम लोगों की आदत का हिस्सा बन चुका है।

डिजिटल लेनदेन बढ़ने के प्रमुख कारण

स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच

यूपीआई और क्यूआर कोड का आसान उपयोग

सरकार का डिजिटल इंडिया अभियान

बैंकों द्वारा नई डिजिटल सुविधाओं का विस्तार

कैशलेस भुगतान के प्रति बढ़ती जागरूकता

नकदी रखने की आवश्यकता में कमी

तेज, सुरक्षित और पारदर्शी लेनदेन

छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापार तक सुविधा

किस डिजिटल माध्यम में कौन आगे

भीम-यूपीआई : पब्लिक सेक्टर बैंक आगे

भीम आधार : प्राइवेट सेक्टर बैंक आगे

भारत क्यूआर : प्राइवेट सेक्टर बैंक का दबदबा

आईएमपीएस : प्राइवेट सेक्टर बैंक आगे

डेबिट/क्रेडिट कार्ड : प्राइवेट सेक्टर बैंक आग

NAV HIND SAMACHAR
Author: NAV HIND SAMACHAR

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