बढ़ता बिहार : ज्ञान, गौरव और विकास की नई उड़ान

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  • इतिहास की धरोहर से भविष्य की संभावनाओं तक बिहार की यात्रा

रंजीत कुमार राय (शोध छात्र, बीएचयू, वाराणसी)

22 मार्च (बिहार दिवस) सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास और उभरते भविष्य का प्रतीक है, जो बिहार की पहचान को निरंतर सशक्त बना रहा है। “बढ़ता बिहार” आज एक नारा भर नहीं, बल्कि एक बदलती सोच, नई ऊर्जा और विकास की ठोस दिशा का परिचायक बन चुका है। बिहार सदियों से ज्ञान की राजधानी रहा है। यही वह भूमि है, जहाँ से विश्व को नीति, धर्म और शासन की अद्भुत सीख मिली। चाणक्य की कूटनीति, गौतम बुद्ध का मध्यम मार्ग, महावीर का अहिंसा का संदेश, चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य निर्माण और अशोक का धम्म, ये सभी इस मिट्टी की अनमोल विरासत हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का योगदान अतुलनीय रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला जैसे विश्वप्रसिद्ध शिक्षण केंद्रों ने भारत को वैश्विक बौद्धिक नेतृत्व प्रदान किया। आज भी बिहार उसी गौरव को पुनः स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है, जहाँ ज्ञान, नवाचार और शिक्षा विकास की धुरी बन रहे हैं। सांस्कृतिक दृष्टि से भी बिहार अत्यंत समृद्ध है। छठ पूजा जैसे महापर्व में आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उगते सूरज की पूजा पूरी दुनिया करती है, लेकिन छठ पूजा में पहला अर्घ्य डूबते सूरज को देकर बिहार यह संदेश देता है कि जो आज डूब रहा है, वह कल उगेगा भी और अपनी चमक से पूरी दुनिया को रोशन करेगा।

जंगलराज, अपराध, अराजकता और पलायन जैसे कठिन दौर को झेल चुका बिहार अब तेजी से नव-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिकता और दृष्टिकोण के बदलाव का भी संकेत है। आज का बिहार विकास की नई गाथा लिखने के लिए उत्सुक और प्रतिबद्ध है।

इतिहास गवाह है कि जब भारत में लोकतंत्र की नींव डगमगाने लगी और आपातकाल जैसी स्थिति बनी, जब लोगों के मौलिक अधिकारों पर संकट आया, तब बिहार की धरती ने एक बार फिर देश को दिशा दी। जयप्रकाश नारायण ने पटना के गांधी मैदान से हुंकार भरी और जनांदोलन का नेतृत्व किया। वहीं रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियाँ- “खाली करो सिंहासन, कि जनता आती है”, जन-जन की आवाज़ बन गईं। उस दौर के अंधकार के बाद भारत में लोकतंत्र और जनतंत्र का मार्ग पुनः प्रशस्त हुआ।

आज का बिहार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। युवा शक्ति, उद्यमिता और नई सोच बिहार को एक नई दिशा दे रहे हैं। “बढ़ता बिहार” अब केवल अतीत की स्मृतियों तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को साकार करने का संकल्प बन चुका है। हालाँकि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। रोज़गार, शिक्षा की गुणवत्ता, और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में और काम की आवश्यकता है। लेकिन जिस तरह से राज्य आगे बढ़ रहा है, वह यह विश्वास दिलाता है कि बिहार एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक पहचान को आधुनिक उपलब्धियों से जोड़कर नई ऊँचाइयों को छुएगा। बिहार दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ।

NAV HIND SAMACHAR
Author: NAV HIND SAMACHAR

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