आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• सोनभद्र, रीवा सहित आठ राज्यों में फैला साइबर ठगी का नेटवर्क
• ₹11 करोड़ के थोखाधड़ी का आरोप
सोनभद्र । धार्मिक और सामाजिक सेवा का नाम, सोनभद्र का पता और मध्य प्रदेश के रीवा में एक कमरे से कथित साइबर ठगी का नेटवर्क! पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने एक ऐसे मामले को उजागर किया है, जिसमें सत्य सनातन ट्रस्ट के खाते में कथित साइबर ठगी के 2 करोड़ 37 लाख रुपये पहुंचने की जानकारी मिली है। आरोप है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और गोरक्षा जैसे सामाजिक कार्यों का हवाला देकर लोगों का भरोसा जीता गया और फिर इसी विश्वास की आड़ में साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस के मुताबिक, फरवरी से अक्टूबर के बीच आठ राज्यों में करीब 11 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा मामला सामने आया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों और दूसरी संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सोनभद्र के पते पर ट्रस्ट, रीवा से कथित नेटवर्क का संचालन –
पुलिस जांच के अनुसार, सत्य सनातन ट्रस्ट का गठन सोनभद्र के पते पर किया गया था, जबकि कथित साइबर ठगी की गतिविधियां मध्य प्रदेश के रीवा में किराये पर लिए गए एक कमरे से संचालित की जा रही थीं। आरोप है कि इसी ठिकाने से ओटीपी के जरिए साइबर ठगी की गतिविधियों को अंजाम दिया जाता था। हालांकि, ट्रस्ट के गठन, उसके बैंक खातों और कथित ठगी के नेटवर्क के बीच संबंधों को लेकर जांच अभी जारी है।
आठ राज्यों तक पहुंची ठगी की शिकायते –
जांच में अब तक साइबर क्राइम पोर्टल पर 35 शिकायतें सामने आने की जानकारी मिली है। एसपी अभिषेक वर्मा के मुताबिक, शिकायतें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत आठ राज्यों से जुड़ी हैं। इनमें कर्नाटक से सर्वाधिक 11 शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस जांच में करीब 11 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इसमें से 2 करोड़ 37 लाख रुपये सत्य सनातन ट्रस्ट के बैंक खाते में पहुंचने की जानकारी मिली है, जबकि शेष रकम दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित किए जाने की बात सामने आई है। अब पुलिस इन खातों के लेन-देन की पड़ताल कर रही है, ताकि रकम के वास्तविक प्रवाह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
पहले दूसरी संस्थाओं से जुड़ने, फिर ट्रस्ट बनाने का आरोप –
एसपी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के बारे में यह जानकारी भी सामने आई है कि वे करीब दो साल पहले इस तरह की गतिविधियों से जुड़े थे। बताया जा रहा है कि शुरुआत में उन्होंने पटना के एक फाउंडेशन से जुड़कर काम सीखा और करीब छह महीने तक वहां रहे। इसके बाद वाराणसी के पते पर पंजीकृत एक अन्य धार्मिक नाम वाली संस्था से जुड़ने की बात भी जांच में सामने आई है।
एसपी के अनुसार, इसी साल की शुरुआत में आरोपियों ने सत्य सनातन ट्रस्ट के नाम से संस्था बनाई। हालांकि, पूर्व में जिन संस्थाओं से आरोपियों के जुड़ाव की बात सामने आई है, उनकी भूमिका और इस मामले से उनके संभावित संबंधों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस इस पहलू पर भी साक्ष्य जुटा रही है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और गोरक्षा के नाम पर भरोसा जीतने का आरोप –
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू सामाजिक और धार्मिक कार्यों के नाम पर लोगों का विश्वास हासिल किए जाने का आरोप है। जांच के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य और गोरक्षा संवर्धन जैसे विषयों का हवाला देकर लोगों को प्रभावित किया जाता था। संस्था से कुछ लोगों को पदाधिकारी के रूप में जोड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संस्था से जुड़े लोगों में किसकी क्या भूमिका थी और कथित ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई। नेटवर्क में महिलाओं समेत अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने तक किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता को पुष्ट नहीं माना जा सकता।
तीन गिरफ्तार, अन्य संदिग्धों की तलाश –
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि “मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं। पुलिस बैंक खातों के लेन-देन, आरोपियों के संपर्कों और कथित नेटवर्क से जुड़ी अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।”
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






