आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान लगातार हो रहे मरीजों की मौत के मामलों और अवैध अस्पतालों की शिकायतों के बीच जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने मरीजों को जागरूक करने की दिशा में अहम पहल की है। अब जिले में कलेक्ट्रेट, विभिन्न प्रमुख चौराहों, मेडिकल कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर वैध एवं पंजीकृत निजी अस्पतालों की सूची वाले होर्डिंग लगाए जाएंगे। सीएमओ की इस पहल का उद्देश्य मरीजों और उनके तीमारदारों को सही जानकारी उपलब्ध कराना, उन्हें गुमराह कर निजी अस्पतालों तक ले जाने वाले दलालों पर अंकुश लगाने में मदद करना और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।
सरकारी अस्पतालों के बाहर खुलेगी वैध अस्पतालों की ‘पोल-पट्टी’ –
आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। ऐसे में कई मरीजों और उनके परिजनों को जिले में संचालित निजी अस्पतालों की वैधता और वहां उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाती। इसी का फायदा उठाकर मरीजों को गुमराह करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने सार्वजनिक स्थलों पर पंजीकृत निजी अस्पतालों की सूची प्रदर्शित कराने का निर्णय लिया है। होर्डिंग पर अस्पतालों के नाम, पते और उपलब्ध चिकित्सकों से संबंधित जानकारी दी जाएगी, जिससे मरीज अपनी जरूरत के अनुसार अस्पताल के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
कलेक्ट्रेट से सीएचसी-पीएचसी तक पहुंचेगी जानकारी –
सीएमओ की इस पहल का दायरा केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। कलेक्ट्रेट, प्रमुख चौराहों, मेडिकल कॉलेज, सीएचसी-पीएचसी और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग लगाए जाने से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पंजीकृत निजी अस्पतालों की जानकारी मिल सकेगी।
इस व्यवस्था से उन मरीजों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो पहली बार इलाज के लिए जिला मुख्यालय पहुंचते हैं और स्थानीय अस्पतालों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। सार्वजनिक स्थलों पर सूची उपलब्ध होने से उन्हें अस्पतालों के नाम और पते जानने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
मरीजों को गुमराह करने वाले दलालों पर कसेगा शिकंजा?
सरकारी अस्पतालों के आसपास सक्रिय दलालों द्वारा मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाने की शिकायतें स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती बनी हुई हैं। मरीजों को बेहतर इलाज का भरोसा देकर निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के बाद उनसे मनमाना शुल्क वसूले जाने की आशंका भी चिंता का विषय है।
ऐसे में सीएमओ की पहल मरीजों को अस्पतालों के पंजीकरण के संबंध में जानकारी हासिल करने का अवसर देगी। यदि किसी अस्पताल का नाम सूची में नहीं मिलता है, तो मरीज संबंधित अस्पताल की वैधता के बारे में स्वास्थ्य विभाग से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
हालांकि, सूची में नाम नहीं होने मात्र से किसी अस्पताल को अवैध नहीं माना जा सकता। इसके लिए विभागीय सत्यापन आवश्यक होगा। इसके बावजूद यह व्यवस्था मरीजों में जागरूकता बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकती है।
लोगों को गुमराह होने से बचाना उद्देश्य –
सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने कहा कि “मरीजों और उनके तीमारदारों को निजी अस्पतालों की वैधता और पंजीकरण के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों के बाहर पंजीकृत निजी अस्पतालों की सूची प्रदर्शित कराने का उद्देश्य लोगों को गुमराह होने से बचाना और उन्हें इलाज के लिए सही विकल्प चुनने में मदद करना है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रूप से संचालित अस्पतालों और मरीजों को बहला-फुसलाकर ले जाने वाले दलालों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।”
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






