आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जमीन से जुड़े विवाद के निस्तारण की प्रक्रिया के बीच चकबंदी विभाग के एक पेशकार पर रिश्वत मांगने का आरोप लगने से मामला गरमा गया है। दुद्धी तहसील क्षेत्र के कोंगा गाँव निवासी रामदयाल ने दावा किया है कि जमीन संबंधी मामले को निपटाने के नाम पर उनसे 25 हजार रुपये मांगे गए, जिसके बाद उन्होंने करीब डेढ़ से दो महीने पहले 20 हजार रुपये दिए। इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ा। अब कथित बातचीत और लेनदेन से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। हालांकि वायरल वीडियो की नवहिंद समाचार पुष्टि नहीं करता है।
80-85 बीघा जमीन के सर्वे में गड़बड़ी का आरोप –
रामदयाल के अनुसार, धनखोर, आजनगिरा और कोंगा गांवों में करीब 80 से 85 बीघा जमीन के सर्वे में गड़बड़ी कर अलग-अलग लोगों के नाम जमीन दर्ज किए जाने का आरोप है। इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायत किए जाने की बात उन्होंने बताई। शिकायत के बाद जांच के दौरान गांव से साक्ष्य लिए जाने का भी दावा किया गया है।
पीड़ित का कहना है कि जांच के बाद उनके पक्ष में जमीन के अभिलेखों में सुधार का आदेश होने की बात सामने आई थी। इसी मामले की प्रक्रिया चकबंदी विभाग में चल रही थी।
बहस पूरी होने के बाद पेशकार के पास अटकी थी फाइल –
पीड़ित रामदयाल के मुताबिक मामले में बहस पूरी हो चुकी थी और इसके बाद फाइल पेशकार के पास लंबित थी। आरोप है कि इसी दौरान निस्तारण के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग की गई। उनका दावा है कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बच्चों के खर्च में कटौती कर किसी तरह 20 हजार रुपये जुटाकर दे दिए।
आरोप है कि रकम देने के बाद जल्द काम होने का भरोसा दिया गया था, लेकिन डेढ़ से दो महीने गुजरने के बाद भी मामले का निस्तारण नहीं हुआ। पीड़ित का कहना है कि अब संबंधित पेशकार फोन भी रिसीव नहीं कर रहे हैं।
रिश्वत के आरोप से चकबंदी प्रक्रिया पर उठी उंगली –
चकबंदी से जुड़े मामलों में जमीन के अभिलेख, स्वामित्व और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण विषय जुड़े होते हैं। ऐसे में निस्तारण के नाम पर पैसे मांगने का आरोप सामने आना सामान्य शिकायत नहीं माना जा सकता। पीड़ित का दावा सही है या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन वायरल वीडियो और शिकायत ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह न केवल संबंधित कर्मचारी की भूमिका पर कार्यवाही का विषय होगा, बल्कि यह भी जांच का मुद्दा बनेगा कि फाइल के निस्तारण के लिए कथित तौर पर रकम मांगने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची और इसमें किसी अन्य की भूमिका थी या नहीं।
जमीन विवाद में दबंगई और धमकी का भी आरोप –
पीड़ित रामदयाल ने जमीन विवाद को लेकर दबंगई और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें फसल काटने, रास्ता रोकने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकियां दी गईं। पीड़ित ने कथित बातचीत और लेनदेन से संबंधित वीडियो को सामने रखते हुए अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और जमीन विवाद का निष्पक्ष समाधान कराने की मांग की है।
दुद्धी-ओबरा से जुड़े पेशकार की भूमिका की जांच की मांग –
पीड़ित के अनुसार संबंधित पेशकार का दुद्धी और ओबरा क्षेत्र के चकबंदी कार्यों से जुड़ा है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ संबंधित फाइल की स्थिति, कथित रकम के लेनदेन और वायरल वीडियो की सत्यता की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पेशकार का पक्ष नहीं आया सामने –
मामले में संबंधित पेशकार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। चकबंदी विभाग की ओर से भी आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।






