आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । समान कार्य के बदले समान वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ का पूरे जनपद में विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने मंगलवार को भी अपने-अपने कार्यस्थलों पर काला फीता बांधकर सांकेतिक प्रदर्शन किया और शासन की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन, नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को एनएचएम में समायोजित करने सहित लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न सेवाओं में जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्षों से सेवा के बावजूद हक से वंचित कर्मचारी –
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला ने कहा कि “कर्मचारी लंबे समय से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में जुटे हैं। इसके बावजूद संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को उनके अधिकारों और सुविधाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण कर्मचारियों की जायज मांग है। काला फीता बांधकर विरोध जताना फिलहाल सांकेतिक आंदोलन है। यदि शासन ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी आंदोलन को अगले चरण में ले जाने के लिए बाध्य होंगे।”
8 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी –
उन्होंने कहा कि काला फीता बांधकर किया जा रहा प्रदर्शन शासन और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का शांतिपूर्ण माध्यम है। इसके बाद भी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो 8 अक्टूबर से इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों और मुख्यालय पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करें।
12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना –
जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला ने बताया कि “यदि इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी टकराव नहीं चाहते, लेकिन लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी भी स्वीकार नहीं की जाएगी। कर्मचारी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”






