आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । सरकार जनपदों में मेडिकल कॉलेज खोलकर आमजन को बेहतर और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन सोनभद्र के लोढ़ी स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में सामने आ रही बदइंतजामी इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। नए प्राचार्य की तैनाती को अभी चंद दिन ही हुए हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं ने उन्हें पहली ही चुनौती पेश कर दी। बीती रात से बिजली गुल होने के चलते अस्पताल परिसर अंधेरे में डूबा रहा, वहीं मरीजों के तीमारदार ब्लड रिपोर्ट के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए।
मेडिकल कॉलेज में बेहतरीन इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों के लिए रात किसी मुसीबत से कम नहीं रही। बिजली व्यवस्था ठप होने से अस्पताल की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने की बात सामने आई। सबसे अधिक परेशानी उन तीमारदारों को हुई, जो अपने मरीजों की जांच रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे थे। जब अस्पताल में जांच के बाद रिपोर्ट समय पर नहीं मिले तो मरीज और उनके परिजन आखिर इलाज को लेकर किससे उम्मीद करें?
नए प्राचार्य के सामने ही व्यवस्था सुधारना पहली चुनौती –
गौरतलब है कि 23 सितंबर को डॉ0 आनंद कुमार के स्थान पर डॉ0 आइजेन भट्टाचार्या को नए प्राचार्य के रूप में तैनात किया गया है। ऐसे में पदभार संभालने के साथ ही मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर उनके सामने है। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का घंटों बाधित रहना और मरीजों की रिपोर्ट को लेकर तीमारदारों का परेशान होना निश्चित तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
नए प्राचार्य के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल विभागीय कामकाज संभालने की नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज की चरमराती व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने की भी है। अस्पताल की बिजली व्यवस्था कितनी मजबूत है? वैकल्पिक बिजली व्यवस्था कितनी प्रभावी है? जांच रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने की क्या व्यवस्था है? और सबसे अहम—ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था आखिर क्या है?
क्या मरीजों को अंधेरे में मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा –
मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि जांच, उपचार और कई जरूरी चिकित्सकीय सेवाओं की आधारभूत जरूरत है। ऐसे में घंटों बिजली गुल रहने की स्थिति ने व्यवस्थाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि अगर रातभर बिजली गुल रहने की स्थिति बनी रही तो अस्पताल प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था कहां थी? क्या जनरेटर या बैकअप पावर व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी? यदि बैकअप मौजूद था तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? और यदि तकनीकी खराबी थी तो उसे तत्काल दूर करने की जिम्मेदारी किसकी थी?
रिपोर्ट के इंतजार में मरीज, जवाबदेही किसकी –
मरीजों के तीमारदारों के लिए ब्लड रिपोर्ट इलाज की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में घंटों रिपोर्ट का इंतजार करना केवल असुविधा का मामला नहीं है। इससे इलाज में देरी की आशंका भी पैदा होती है। मरीज अस्पताल में इलाज कराने आता है, व्यवस्था की खामियों का इंतजार करने नहीं।
ऐसे में नए प्राचार्य के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को कितनी जल्दी दुरुस्त कर पाते हैं। क्या बिजली, जांच रिपोर्ट, मरीजों की सुविधाओं और शिकायतों के त्वरित निस्तारण को लेकर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी? क्या जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
‘बहरहाल नई जिम्मेदारी के साथ नई उम्मीदें भी नवागत प्राचार्य डॉ0 आइजेन भट्टाचार्या के सामने मेडिकल कॉलेज को केवल प्रशासनिक रूप से संचालित करने की नहीं, बल्कि व्यवस्था में भरोसा पैदा करने की चुनौती भी होगी। मरीजों को समय पर जांच रिपोर्ट, निर्बाध बिजली, बेहतर साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाएं मिलना किसी भी मेडिकल कॉलेज की प्राथमिक जरूरत होनी चाहिए। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि नवागत प्राचार्य के कार्यकाल की शुरुआत क्या इसी बदइंतजामी को खत्म करने के संकल्प से होगी या मरीज और उनके तीमारदार आगे भी व्यवस्थाओं की खामियों के बीच इलाज कराने को मजबूर होते रहेंगे?”






