Sonbhadra News : ई-चालान सिस्टम में बड़ा बदलाव, अब ‘नेक्स्टजेन एप’ से कटेगा चालान

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । परिवहन विभाग की ई-चालान व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब पुरानी प्रणाली से चालान जारी नहीं किए जाएंगे। 23 सितंबर की रात 12 बजे से नई व्यवस्था लागू कर दी गई है और आगे से चालान प्रक्रिया ‘नेक्स्टजेन ई-चालान’ मोबाइल एप और पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी।

नई व्यवस्था लागू करने के साथ पुराने ई-चालान एप और पोर्टल में मौजूद चालानों के आंकड़ों को नए ई-चालान सर्वर पर स्थानांतरित करने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रदेशभर में पुराने चालानों की संख्या अधिक होने के कारण डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया में करीब दो से तीन दिन का समय लग सकता है। इसके चलते अगले तीन से चार दिनों तक पुराने ई-चालान से संबंधित कार्य प्रभावित रहेंगे। इस अवधि में पुराने तंत्र पर चालान से जुड़े कार्य नहीं हो सकेंगे।

नए चालान नए पोर्टल पर होंगे दर्ज –

एआरटीओ प्रशासन कौशल कुमार सिंह ने बताया कि “नया ई-चालान मोबाइल एप और पोर्टल शुरू किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा जारी किए जाने वाले चालान नए एप के माध्यम से ही बनाए जाएंगे। नया चालान जारी होते ही वह नए पोर्टल पर दिखाई देने लगेगा। उन्होंने बताया कि पुरानी व्यवस्था में मौजूद चालानों के आंकड़ों को नए सर्वर पर स्थानांतरित किया जा रहा है। डेटा की बड़ी मात्रा होने के कारण प्रक्रिया पूरी होने में कुछ समय लग रहा है। स्थानांतरण पूरा होने के बाद पुराने चालानों का रिकॉर्ड भी नए पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया जाएगा।”

मोबाइल-टैबलेट से होगी कार्यवाही –

नई व्यवस्था के तहत प्रवर्तन अधिकारियों को अपने मोबाइल अथवा टैबलेट में नया ई-चालान एप लोड करना होगा। प्रारंभिक परीक्षण के दौरान वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र, चालक का लाइसेंस और कार्यालय से संबंधित विवरणों की जांच की जाएगी। इसके बाद नई प्रणाली के माध्यम से चालान की प्रक्रिया संचालित होगी। परिवहन विभाग का यह बदलाव ई-चालान व्यवस्था को नए तकनीकी प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, पुराने रिकॉर्ड के स्थानांतरण के दौरान वाहन चालकों को पुराने चालानों से संबंधित कुछ सेवाओं के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।

“बहरहाल नई व्यवस्था शुरू होने के बाद अब वाहन चालकों और प्रवर्तन अधिकारियों दोनों को नए एप और पोर्टल के साथ तालमेल बैठाना होगा। पुराने चालानों का डेटा नए सर्वर पर स्थानांतरित होने के बाद पूरी व्यवस्था के एकीकृत रूप से संचालित होने की उम्मीद है।”

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