लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग के भीतर लंबे समय से सुलग रहा शीतयुद्ध अब खुलकर सामने आ गया है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अपने ही विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष कुमार गोयल को एक बेहद तल्ख पत्र लिखकर उन पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मंत्री ने अध्यक्ष पर सीधे तौर पर जाति, धर्म और भ्रष्टाचार के आधार पर कुशल कर्मचारियों की छंटनी करने और उनकी जगह अकुशल लोगों को भर्ती करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं पर 10% ईंधन अधिभार लगाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले में भी मंत्री को पूरी तरह अंधेरे में रखने की बात सामने आई है। ऊर्जा मंत्री ने इस पत्र के जरिए बिंदुवार तरीके से अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे शासन का सख्त निर्देश समझने और भविष्य में ऐसी हरकतों की पुनरावृत्ति न करने की अंतिम चेतावनी दी है।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पत्र में उल्लेख किया है कि वह वर्ष 2025 में भी विभिन्न तिथियों में इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने साफ कहा कि लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी एवं कुशल कर्मचारियों को निकालकर मनमाने ढंग से अकुशल और मनचाहे लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं। बार-बार मना करने के बाद भी जब यह छंटनी नहीं रुकी, तो इसका खामियाजा आज जनता को बिजली अव्यवस्था के रूप में भुगतना पड़ रहा है। मंत्री ने सहारनपुर के एक लाइनमैन को हटाए जाने के मामले का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इस प्रकार की मनमानी से विभाग के भीतर तकनीकी, प्रशासनिक और राजनैतिक रूप से बड़ी समस्याएं खड़ी की जा रही हैं।
विभागीय समन्वय की कमी को उजागर करते हुए ऊर्जा मंत्री ने पत्र में लिखा कि गत 29 मई को उपभोक्ताओं पर 10% फ्यूल एंड पावर पर्चेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) लगा दिया गया और इसे जून के बिल से वसूलने का निर्देश भी जारी हो गया। इस बड़े फैसले की जानकारी विभाग के मंत्री होने के नाते उन्हें मिलने के बजाय मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में सवाल उठाया कि जनता पर व्यापक असर डालने वाले इतने महत्वपूर्ण विषय पर उनकी सहमति क्यों नहीं ली गई और कम से कम इसकी पूर्व जानकारी देना भी उचित क्यों नहीं समझा गया? उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे फैसलों को लेकर लापरवाही न बरती जाए।
इसके अलावा, ऊर्जा मंत्री ने भीषण गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार को बदनाम करने वाले लापरवाह कर्मचारियों पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ तमाम विद्युत कर्मी पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, वहीं कुछ कर्मचारी जानबूझकर व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं। ऐसे दोषी कर्मियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और वर्तमान तबादला सत्र में उनका यथायोग्य ट्रांसफर कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट उन्हें सौंपी जाए। मंत्री ने अध्यक्ष के बिना सूचना मुख्यालय छोड़ने पर भी गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा कि मई में आए आंधी-तूफान के कारण जब विद्युत ढांचा बुरी तरह प्रभावित था, तब 30 मई की समीक्षा बैठक में पता चला कि अध्यक्ष मुख्यालय से बाहर हैं और आगे भी तीन दिन बाहर रहने वाले हैं। मंत्री के आग्रह पर ही यह बैठक ऑनलाइन हो सकी। उन्होंने इस व्यवहार को जनहित के विपरीत और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए। दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों पर पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष कुमार गोयल ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ऊर्जा मंत्री के पत्र की जानकारी मिली है, लेकिन इस संबंध में उन्हें कुछ नहीं कहना है, उनके लिए बस उपभोक्ताओं का हित ही सर्वोपरि है।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





