यूपी में फर्जी फास्टैग से टोल टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा, एसटीएफ ने बैंक एजेंट समेत दो को दबोचा

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लखनऊ। राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर फर्जी फास्टैग लगाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एसटीएफ ने दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में सीतापुर के खैराबाद निवासी अनंत राम राठौर और इंडसइंड बैंक का एजेंट नकीब खान शामिल हैं। एसटीएफ की टीम ने दोनों को पॉलीटेक्निक चौराहे के पास से उस वक्त धर दबोचा जब वे किसी नए फर्जीवाड़े की फिराक में थे। तलाशी के दौरान इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो पैन कार्ड और 4,230 रुपये नगद बरामद हुए हैं।

इस पूरी कार्रवाई और गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए एसटीएफ के एएसपी सत्य सेन यादव ने बताया कि यह गिरोह कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी वाहन नंबरों का इस्तेमाल कर बड़ी चालाकी से बैंक के जरिए फास्टैग जारी कराता था। इसके बाद उन फर्जी फास्टैग को दूसरे व्यावसायिक और भारी वाहनों पर चिपका दिया जाता था, जिससे टोल प्लाजा पर सही ऑनलाइन भुगतान से बचा जा सके और कम शुल्क देकर टोल पार कर लिया जाए। जांच के दौरान एक उदाहरण सामने आया जिसमें वाहन संख्या यूपी-32 जेडएन-8925 के लिए फर्जी नंबर एमएच-34 एस-9455 का उपयोग करके फास्टैग हासिल किया गया था, और बाद में उसी फास्टैग का इस्तेमाल लगातार अन्य गाड़ियों पर भी किया जाता रहा।

पूछताछ के दौरान आरोपी बैंक एजेंट नकीब खान ने कबूला कि वर्ष 2022 में अनंत राम राठौर ने ही उसे इंडसइंड बैंक का एजेंट बनवाया था। शुरुआत में उसे सामान्य और जायज तरीके से फास्टैग बनाना सिखाया गया, लेकिन जल्द ही ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में दोनों ने मिलकर फर्जी कागजातों के आधार पर फर्जी फास्टैग बनाने का अवैध खेल शुरू कर दिया। आरोपियों ने स्वीकार किया कि एक फर्जी फास्टैग तैयार करने के बदले उन्हें पांच हजार रुपये तक मिलते थे, जिसे वे आपस में बांट लेते थे। फिलहाल एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालने में जुटी है और यह पता लगा रही है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक के अन्य कौन-कौन से कर्मचारी शामिल थे तथा अब तक कुल कितने फर्जी फास्टैग जारी कर सरकार को वास्तविक राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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