लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सरगर्मियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने बहुप्रतीक्षित अंतिम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। प्रदेश भर में चले व्यापक पुनरीक्षण अभियान, दावों और आपत्तियों के गहन निस्तारण तथा धरातलीय सत्यापन की लंबी प्रक्रिया के बाद जारी हुई इस सूची में राज्यभर में मतदाताओं की संख्या में भारी और उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, अब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए कुल 12 करोड़ 58 लाख 51 हजार 570 मतदाता पंजीकृत किए गए हैं। इस पूरे पुनरीक्षण अभियान के दौरान जहां एक तरफ 1 करोड़ 81 लाख 96 हजार 367 नए और युवा मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए, वहीं दूसरी तरफ मृतक, स्थानांतरित या अपात्र पाए गए 1 करोड़ 41 लाख 76 हजार 809 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए भी गए हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं की कुल संख्या में शुद्ध रूप से 40 लाख 19 हजार 558 वोटरों का इजाफा हुआ है, जो आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।
आयोग द्वारा जारी जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी लखनऊ की अंतिम मतदाता सूची में इस बार 10 लाख 85 हजार 180 वोटरों के नाम शामिल हैं। वहीं अन्य प्रमुख जनपदों की बात करें तो प्रयागराज में 34 लाख 95 हजार 203, गोरखपुर में 29 लाख 63 हजार 142 और बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में 17 लाख 93 हजार 504 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही अब ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) और जिला पंचायत चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों को और अधिक गति मिलने की संभावना प्रबल हो गई है। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक चुनाव के आधिकारिक कार्यक्रम या तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। गौरतलब है कि वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का वैधानिक कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही आगामी छह माह तक के लिए ‘प्रशासक’ के रूप में कार्य करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी है, जिससे गांवों के विकास कार्य प्रभावित न हों।
दूसरी तरफ, पंचायत चुनाव में सबसे संवेदनशील माने जाने वाले सीटों के आरक्षण की व्यवस्था तय करने के लिए गठित पिछड़ा वर्ग आयोग की विस्तृत रिपोर्ट का अभी भी इंतजार किया जा रहा है। आयोग को जिलावार सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर अपनी फाइनल रिपोर्ट छह महीने के भीतर प्रदेश सरकार को सौंपनी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग की यह रिपोर्ट जैसे ही सरकार को प्राप्त होगी, सीटों के आरक्षण का निर्धारण कर पंचायत चुनाव की अधिसूचना और मतदान की पूरी प्रक्रिया को बेहद तेज कर दिया जाएगा। हालांकि, सूची जारी होने के बाद शुरुआती दौर में कई जिलों से मतदाताओं को डिजिटल वोटर लिस्ट डाउनलोड करने में कुछ तकनीकी दिक्कतों (सर्वर डाउन होने) का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में निर्वाचन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी समस्याओं को बहुत जल्द दूर करने के प्रयास युद्ध स्तर पर किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के आम मतदाता बिना किसी परेशानी के घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से सूची में अपना नाम आसानी से देख सकें।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





