Sonbhadra News : अब बारिश के भरोसे नहीं रहेगी जिले की खेती, नलकूप और डीप बोरिंग पर मिलेगी 90% तक सब्सिडी

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । खेती-किसानी में सिंचाई की समस्या अब किसानों की मेहनत और फसल की उम्मीदों पर भारी नहीं पड़ेगी। बारिश के भरोसे खेती करने की मजबूरी कम करने और खेतों तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार किसानों को निजी सिंचाई संसाधन विकसित करने में आर्थिक मदद दे रही है। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत डीप बोरिंग कराने पर किसानों को 50 प्रतिशत तक, जबकि उथले नलकूप की स्थापना पर श्रेणी के अनुसार 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। योजना के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में सोनभद्र के 773 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डीप बोरिंग के 85 और उथले नलकूप के 688 लक्ष्य –

लघु सिंचाई विभाग ने चालू वित्त वर्ष में जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए हैं। सहायक अभियंता एमआर मौर्या ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में 85 किसानों को डीप बोरिंग तथा 688 किसानों को उथले नलकूप की बोरिंग कराने पर अनुदान देने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह कुल 773 किसानों को योजना से जोड़ने की तैयारी है।

डीप बोरिंग पर आधा खर्च उठाएगी सरकार –

योजना के तहत डीप बोरिंग कराने वाले किसानों को लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उथले नलकूप की स्थापना पर किसानों की श्रेणी के अनुसार 50 से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। इससे किसानों को निजी सिंचाई संसाधन विकसित करने में आर्थिक बोझ कम उठाना पड़ेगा। विशेष रूप से उन किसानों को इसका लाभ मिलेगा, जिन्हें खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता है।

बारिश की बेरुखी से खेती प्रभावित होने की मजबूरी होगी कम –

सोनभद्र जैसे जिले में खेती के लिए समय पर पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। मानसून की अनिश्चितता और सिंचाई के सीमित संसाधनों के चलते किसानों को कई बार फसलों की जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में निजी नलकूप और डीप बोरिंग की सुविधा किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। सिंचाई के स्थायी संसाधन उपलब्ध होने से किसान समय पर बुवाई करने के साथ फसलों को जरूरत के मुताबिक पानी दे सकेंगे।

एक से अधिक फसल लेने के भी बढ़ेंगे अवसर –

सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने से किसानों को केवल खरीफ की फसल तक सीमित रहने की मजबूरी से राहत मिल सकती है। खेतों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने पर रबी सहित अन्य मौसमी फसलों की खेती के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आमदनी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

Anand Kumar Chaubey
Author: Anand Kumar Chaubey

9 years experience in Journalism....

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