आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले की सड़कों पर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए दौड़ने वाली एम्बुलेंस की आड़ में नियमों से खिलवाड़ का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर शुरू हुए विशेष चेकिंग अभियान में महज दो दिनों के भीतर छह एम्बुलेंस का चालान किया जा चुका है। वहीं विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में पंजीकृत करीब 105 एम्बुलेंस में लगभग 40 वाहनों की फिटनेस फेल है। ऐसे में सवाल सिर्फ कागजात का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा भी है।
बुधवार को एआरटीओ कौशल कुमार सिंह के नेतृत्व में पिपरी रोड पर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान दो एम्बुलेंस बगैर आवश्यक दस्तावेजों के संचालित मिलीं। दोनों के खिलाफ चालान की कार्यवाही की गई। इससे एक दिन पहले पीटीओ मनोज कुमार गुप्ता ने चार एम्बुलेंस का चालान किया था। इस तरह दो दिनों में छह एम्बुलेंस परिवहन विभाग की कार्यवाही की जद में आ चुकी हैं।
फिटनेस के साथ इंश्योरेंस और प्रदूषण की भी जांच –
चेकिंग अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीम एम्बुलेंस की फिटनेस के साथ इंश्योरेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य अनिवार्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। विभागीय टीम की कार्यवाही शुरू होते ही कुछ एम्बुलेंस चालक अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर मौके से निकल गए। इससे अभियान के दौरान नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे वाहनों को लेकर विभाग की सख्ती का अंदाजा लगाया जा सकता है।
105 पंजीकृत, करीब 40 की फिटनेस फेल –
एआरटीओ कौशल कुमार सिंह के मुताबिक “जनपद में करीब 105 एम्बुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 40 वाहनों की फिटनेस फेल पाई गई है। विभाग इन वाहनों को चिन्हित कर रहा है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एम्बुलेंस संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना वैध फिटनेस और जरूरी दस्तावेजों के कोई भी एम्बुलेंस सड़क पर संचालित मिली तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
सड़कों पर एम्बुलेंस की भरमार, पंजीकरण के आंकड़े सीमित –
जिले में एम्बुलेंस के नाम पर बड़ी संख्या में ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं, जिन पर एम्बुलेंस लिखकर मरीजों को लाने-ले जाने का काम किया जाता है। हालांकि परिवहन विभाग के आंकड़ों में पंजीकृत एम्बुलेंस की संख्या करीब 105 ही है। ऐसे में सड़कों पर वास्तव में कितने वाहन एम्बुलेंस के रूप में संचालित हो रहे हैं और उनमें से कितने वैध मानकों पर खरे उतरते हैं, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
एम्बुलेंस की आड़ में तस्करी का मामला भी आ चुका सामने –
एम्बुलेंस के इस्तेमाल को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कुछ दिन पूर्व पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक एम्बुलेंस को पकड़ा था। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया कि मरीजों की सेवा के लिए निर्धारित इस आपातकालीन वाहन का कहीं नियमों के विपरीत अन्य गतिविधियों में तो इस्तेमाल नहीं हो रहा। ऐसे में परिवहन विभाग के मौजूदा अभियान को केवल फिटनेस और कागजात की जांच तक सीमित रखने के बजाय एम्बुलेंस के पंजीकरण, संचालन, परमिट और निर्धारित मानकों की व्यापक जांच से जोड़ने की जरूरत महसूस हो रही है।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा है मामला –
एम्बुलेंस कोई सामान्य यात्री वाहन नहीं है। इसमें गंभीर हालत में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया जाता है, ऐसे में वाहन की तकनीकी फिटनेस, ब्रेक, टायर, इंश्योरेंस और अन्य सुरक्षा मानकों का दुरुस्त होना बेहद जरूरी है। फिटनेस फेल वाहन यदि मरीजों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं तो यह महज परिवहन नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसी भी वक्त गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।






