Sonbhadra News : नियमितीकरण, समान वेतन सहित छः सूत्रीय माँग को लेकर NHM कर्मचारियों ने काली पट्टी बांध जताया विरोध

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला के नेतृत्व में अपने-अपने कार्यस्थलों पर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला ने कहा कि “स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण सेवाओं में संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारी लंबे समय से लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद सेवा सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इसी को लेकर कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि छह सूत्रीय मांगों में संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का एनएचएम में समायोजन, सभी संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ, ईपीएफ सहित सामाजिक सुरक्षा की सुविधा तथा स्थायी भर्ती में संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को उचित छूट एवं प्राथमिकता दिए जाने की मांग शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का विरोध स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि शासन तक अपनी समस्याएं शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाने के लिए है। प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार आंदोलन को चरणबद्ध एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।”

 

कोषाध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि “एनएचएम के संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ की तरह लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। दिन-रात स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों से स्वास्थ्य सेवाओं में पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ काम लिया जा रहा है, लेकिन जब उनके अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की बात आती है तो वर्षों से लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हो पा रहा है। सरकार को संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।”

 

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