सोनभद्र। जिले में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ के तहत साइबर पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, फर्जी और म्यूल (Mule) खातों के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हो रहा है। सोनभद्र से शुरू हुई इस जांच के तार अब वाराणसी तक जुड़े पाए गए हैं। हाल ही में वाराणसी में सोनभद्र के तीन अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जिले भर में अपनी छानबीन और तेज कर दी है। अब तक की जांच-पड़ताल में करीब 150 संदिग्ध म्यूल खाते चिह्नित किए जा चुके हैं, जबकि इस संबंध में 5 अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि महज एक ही बैंक की शाखा में खोले गए 100 से अधिक संदिग्ध खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन की बात सामने आई है, जिसने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को सतर्क कर दिया है।
जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी का यह गिरोह गरीब तबके के लोगों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को निशाना बना रहा था। गिरोह के सदस्य किसी को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे तो किसी को प्रति खाता 5 हजार रुपये कमीशन या आर्थिक मदद का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवा लेते थे। पहचान छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी इन भोले-भाले लोगों के पहचान पत्रों में पते तक संशोधित करवा देते थे, ताकि जांच एजेंसियों के लिए मुख्य खाताधारक तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। पुलिस की छानबीन के अनुसार, म्योरपुर थाना क्षेत्र के बरियारी की रहने वाली आरती नामक महिला ने बभनी के अनिल कुमार को झांसे में लेकर उसके पहचान पत्र में पता बदलवाया और वाराणसी के कई बैंकों में उसके नाम पर खाते खुलवा दिए। इसी तरह दुद्धी के उमंग और किरवानी की मालती को भी पैसों का लालच देकर इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बना लिया गया। साइबर पुलिस टीम अब इन सभी 150 चिह्नित खातों की बैंकिंग ट्रेल खंगाल रही है और इस पूरे नेटवर्क के सरगना तक पहुंचने के लिए वाराणसी पुलिस के साथ मिलकर लगातार छापेमारी कर रही है।
Author: Harsh Vardhan
7 years experience in the field of journalism.





