रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र)। जनपद में अवैध खनन और अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रॉबर्ट्सगंज पुलिस, एसओजी और खनन विभाग की संयुक्त टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने पुराने और प्रयुक्त ई-फॉर्म C/MM-11 (खनिज परिवहन परमिट) में हेराफेरी कर फर्जी परमिट तैयार करने वाले एक शातिर अंतरप्रांतीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के 5 सदस्यों को मौके से गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सहित 3 अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे गोरखधंधे का सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से फर्जीवाड़ा करने में प्रयुक्त होने वाला लैपटॉप, प्रिंटर, सुरक्षा दस्तावेज (सिक्योरिटी पेपर) और भारी मात्रा में अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने एक सूचना के आधार पर वाहन चालक दिलीप प्रजापति को हिरासत में लेकर पूछताछ की। चालक दिलीप प्रजापति ने बताया कि वह अश्वनी कुमार पटेल के हाइवा वाहन (संख्या UP64AT5155) को चलाता है। उसने कुबूल किया कि अश्वनी कुमार पटेल, हिमांशु पाण्डेय, मोहन उर्फ अजय कुमार और बिल्ली मारकुंडी स्थित ‘AK इंटरप्राइजेज’ के संचालक व उसके कर्मचारियों ने मिलकर पुराने प्रयुक्त हो चुके ई-फॉर्म C/MM-11 में कंप्यूटर के जरिए वाहन संख्या, तारीख और समय बदलकर फर्जी परमिट तैयार किया था। इसी जाली परमिट के सहारे विंध्याचल स्टोन क्रशर से गिट्टी लोड कराकर उसे परिवहन के लिए सौंपी गई थी। चालक ने यह भी स्वीकार किया कि उसे इस अवैध काम के लिए प्रत्येक चक्कर के बदले ₹5,000/- देने का लालच दिया गया था, जिसके कारण उसने जानबूझकर इस जाली दस्तावेज का इस्तेमाल किया।

चालक की निशानदेही पर जब पुलिस, खनन निरीक्षक अतुल दूबे और एसओजी प्रभारी नागेश कुमार सिंह की संयुक्त टीम ने बिल्ली मारकुंडी स्थित AK इंटरप्राइजेज के दफ्तर पर योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी, तो वहां हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके से अमरनाथ त्रिपाठी उर्फ राजू त्रिपाठी, रितेश कुमार जायसवाल, संतोष कुमार जायसवाल और मोहन उर्फ अजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। दफ्तर की तलाशी के दौरान पुलिस को एक डेल कंपनी का लैपटॉप, एक एचपी लेजरजेट प्रो प्रिंटर, सिक्योरिटी पेपर के 3 बंडलों में कुल 748 अप्रयुक्त सेट और 17 बंडलों में रखे लगभग 1000 पहले से इस्तेमाल हो चुके ई-फॉर्म C/MM-11 बरामद हुए। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य इन्हीं पुराने और प्रयुक्त हो चुके ओरिजिनल परमिटों का इस्तेमाल करके नए फर्जी परमिट छापने का काम करते थे।
पूछताछ में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि इस फर्जीवाड़े की मुख्य कंदरा बनी AK इंटरप्राइजेज का लाइसेंस बीते 8 जून 2026 को ही समाप्त हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद गिरोह के लोग लाइसेंस अवधि खत्म होने के बाद भी फर्म के नाम पर जारी सिक्योरिटी पेपर और पुराने परमिटों का धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रहे थे और सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ रॉबर्ट्सगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न गंभीर धाराओं सहित खान व खनिज अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा, निरीक्षक बनारसी यादव, मुख्य आरक्षी संदीप राय, विनोद भारती, अवधेश यादव, आरक्षी राजेंद्र कुमार और रमेश कुमार शामिल रहे। फरार चल रहे मुख्य अभियुक्तों अश्वनी कुमार पटेल, हिमांशु पाण्डेय और AK इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सुरेश कुमार पाठक की तलाश में पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
Author: Harsh Vardhan
7 years experience in the field of journalism.





