सील तोड़कर दोबारा खोली गईं चार पैथोलॉजी लैब और अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग ने संचालकों के खिलाफ थानों में दी तहरीर

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सोनभद्र। जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में सील किए गए एक निजी अस्पताल और तीन पैथोलॉजी लैबों का ताला तोड़कर दोबारा अवैध रूप से संचालन शुरू किए जाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विभागीय कार्रवाई और सरकारी आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाने की इस हिमाकत पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी डॉ. गुरु प्रसाद ने शनिवार को जिले के संबंधित थानों में लिखित तहरीर देकर आरोपी संचालकों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से जिले भर के अवैध और मानकविहीन चिकित्सा संस्थानों के संचालकों में हड़कंप मच गया है।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच टीम ने पूर्व में विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान घोर अनियमितताएं, बिना पंजीकरण और मानकों की अनदेखी पाए जाने पर टीम ने सांईनाथ हॉस्पिटल रामगढ़, शिव पैथोलॉजी मधुपुर, रुद्रा पैथोलॉजी घोरावल तथा मॉडर्न पैथोलॉजी दुद्धी को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया था। विभाग की ओर से इन सभी चारों चिकित्सा संस्थानों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी और उनके मुख्य द्वारों पर विधिवत सरकारी सील लगाई गई थी। इसके बावजूद संबंधित संचालकों ने विभागीय आदेशों को ताक पर रखकर और कानून का मखौल उड़ाते हुए गुपचुप तरीके से सरकारी सील तोड़ दी और पैथोलॉजी लैब व अस्पताल का संचालन दोबारा चालू कर दिया।

इस गंभीर धांधली और अवैध संचालन की गोपनीय जानकारी जब स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को मिली, तो विभाग की एक टीम ने मौके पर जाकर गुपचुप तरीके से इसकी तस्दीक की। सील टूटने और दोबारा काम शुरू होने की पुष्टि होते ही नोडल अधिकारी डॉ. गुरु प्रसाद ने बिना कोई समय गंवाए संबंधित क्षेत्रों के थाना प्रभारियों से संपर्क साधा और संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित तहरीर सौंप दी। नोडल अधिकारी डॉ. गुरु प्रसाद ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन द्वारा सील किए गए किसी भी संस्थान का बिना अनुमति के ताला तोड़ना और दोबारा संचालन करना सीधे तौर पर कानून का खुला उल्लंघन और राजकीय कार्य में व्यवधान डालने का संगीन अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे दुस्साहसी संचालकों के खिलाफ ऐसी कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जो एक मिसाल बनेगी ताकि भविष्य में कोई भी अन्य संस्थान विभागीय आदेशों और सरकारी सील की अवहेलना करने का साहस कतई न कर सके। पुलिस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई में जुट गई है।

Harsh Vardhan
Author: Harsh Vardhan

7 years experience in the field of journalism.

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