UP में आईपीएल सट्टेबाजी के नाम पर 700 करोड़ की महाठगी: एआई वीडियो से फंसाए दो लाख युवा, ब्लैक मनी को रियल इस्टेट में खपाने का खेल उजागर

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वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आईपीएल (IPL) मैच के बहाने युवाओं को रियल इस्टेट का खिलाड़ी बनाने और सट्टेबाजी के जाल में फंसाकर देश भर के लगभग दो लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की ठगी करने वा।ले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मुंबई की ‘मलिक फर्म’ द्वारा संचालित इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य ठगी और सट्टेबाजी से कमाए गए काले धन (ब्लैक मनी) को क्रिप्टोकरेंसी और रियल इस्टेट के जरिए सफेद (ह्वाइट) करना था। मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए अब इसकी कमान कैंट पुलिस और एसओजी (SOG) से हटाकर साइबर क्राइम थाने की पुलिस को सौंप दी गई है, जो इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है।

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने ठगी को अंजाम देने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। स्थानीय स्तर पर तीन राज्यों के 13 शातिर युवाओं को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वे देश के चर्चित सेलिब्रिटी और मशहूर चेहरों के एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनरेटेड फर्जी वीडियो बनाएं। इन वीडियो को फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन के रूप में वायरल कर आम लोगों का भरोसा जीता जाता था और उन्हें आईपीएल में सट्टा लगाकर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। इस भ्रामक प्रचार के जाल में आकर देश भर के लाखों लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठे। ठगी की इस विशाल धनराशि को ठिकाने लगाने के लिए मलिक फर्म ने लखनऊ, नोएडा, वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों के रियल इस्टेट सेक्टर में 50 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा निवेश किया है।

इस गिरोह का नेटवर्क कितना सुगठित था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पकड़े गए आरोपियों को आईपीएल सीजन शुरू होने से ठीक पहले मुंबई में बुलाकर बकायदा एक महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। कपसेठी के दिलावरपुर निवासी रितेश दिवाकर शुक्ला और चोलापुर के करमा निवासी रवि यादव इस पूरे नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर लीड कर रहे थे। रितेश अपने पांच साथियों के साथ मुंबई में प्रशिक्षण लेकर लौटा था, जहां उन्हें सिखाया गया था कि ठगी की रकम को कैसे रूट करना है और कहां निवेश करना है। इन आरोपियों तक पैसे पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले महीने ही करीब 30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि हवाला के माध्यम से इन आरोपियों तक पहुंचाई गई थी।

बीती 31 मई को आईपीएल फाइनल मुकाबले की रात कैंट पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने वाराणसी के टकटकपुर स्थित एक अपार्टमेंट में छापेमारी कर इस गिरोह के 13 प्रमुख आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल जेल में बंद हैं। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे मलिक फर्म के मुख्य आकाओं के बारे में ज्यादा नहीं जानते, क्योंकि उन्हें केवल वीडियो कॉल और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए ही गुप्त निर्देश मिलते थे। फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस की टीम आरोपियों के जब्त किए गए बैंक खातों, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल्स और ईमेल डेटा को रिकवर करने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों के जरिए मुंबई में बैठे मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सकता है। इस बड़े नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस अब मुंबई पुलिस से भी संपर्क साधकर संयुक्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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