नाले में छिपाकर रखी 2500 क्विंटल खैर की लकड़ी बरामद, वन विभाग की टीम ने पिता-पुत्र को दबोचा

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सोनभद्र: सीमावर्ती क्षेत्रों में बेशकीमती खैर (कत्था) की लकड़ी की तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। डीएफओ रेणुकूट कमल कुमार के कुशल निर्देशन में वन विभाग की विशेष टीम ने बभनी रेंज के घघरा गांव में एक नाले के भीतर छिपाकर रखे गए खैर की लकड़ी के 165 बोटे (करीब 2500 क्विंटल) सफलतापूर्वक बरामद किए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी और घघरा गांव के निवासी विश्वनाथ तथा उसके पुत्र दिनेश को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। गहन पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे छत्तीसगढ़ के जंगलों से अवैध रूप से यह लकड़ी मंगवाते थे और फिर इसे अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। वन क्षेत्राधिकारी बभनी प्रेमप्रकाश चौबे ने बताया कि क्षेत्र में खैर की लकड़ी की तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके मद्देनजर गठित टीम ने सोमवार को मुखबिर की सटीक सूचना पर घघरा गांव में छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया, जहां नाले में छिपाकर रखे गए खैर के बोटे बरामद हुए और सूचना मिलने पर स्वयं डीएफओ भी मौके पर पहुंच गए। वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित वन अधिनियम की धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए उनका चालान कर दिया है और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य बड़े तस्करों के नेटवर्क की तलाश सरगर्मी से की जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में खैर की लकड़ी की तस्करी का यह खेल कोई नया नहीं है बल्कि यह लंबे समय से जारी है। इससे पूर्व भी जनपद में तस्करी के कई बड़े मामलों का खुलासा हो चुका है। हाल ही में बीती 25 मई 2026 को म्योरपुर वन रेंज के पिंडारी ग्राम पंचायत स्थित नगराज टोला में एक होमगार्ड के खेत से 20 से अधिक खैर के पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे, जहां टीम ने चार अलग-अलग स्थानों से लकड़ी के बोटे बरामद किए थे। इसके अलावा इसी वर्ष 12 जनवरी 2026 को रेणुकूट वन प्रभाग के प्रवर्तन दल ने रनटोला गांव के पास म्योरपुर रोड रेलवे स्टेशन गेट के समीप छत्तीसगढ़ से हरियाणा जा रहे खैर की लकड़ी से लदे एक ट्रक को जब्त किया था, हालांकि चालक और अन्य आरोपी वाहन छोड़कर भागने में सफल रहे थे। पूर्व में भी 16 दिसंबर 2023 को बभनी थाना क्षेत्र के धनखोर तिराहा स्थित एक मकान में छापेमारी के दौरान 29 बोटा खैर की लकड़ी व आरा मशीन बरामद कर विवेक गुप्ता और गणेश गुप्ता को जेल भेजा गया था, जबकि नवंबर 2023 में बीजपुर वन विभाग की टीम ने जरहां वन रेंज के धरतीडांड़ क्षेत्र से करीब 30 बोटा खैर की लकड़ी बरामद कर तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया था।

बाजार विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की मानें तो खैर की लकड़ी को चंदन और सागौन की तरह ही बेहद मूल्यवान माना जाता है। पान में उपयोग होने वाला कत्था मुख्य रूप से इसी लकड़ी के प्रसंस्करण से तैयार किया जाता है, जिसके कारण हरियाणा, पंजाब, दिल्ली समेत देश के कई बड़े राज्यों में इसकी मांग हमेशा चरम पर रहती है। छत्तीसगढ़ और उससे सटे रेणुकूट वन प्रभाग के सघन जंगलों से खैर की अवैध कटाई कर अंतरराज्यीय तस्कर सक्रिय रहते हैं। तस्करों के काम करने का तरीका भी बेहद शातिराना है, वे स्थानीय ग्रामीणों और गरीब लोगों से खैर की लकड़ी वजन के आधार पर बेहद कम कीमत में यानी महज 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदते हैं, लेकिन जब इसे बाहरी बड़े बाजारों में भेजा जाता है तो इसकी बिक्री वजन के बजाय वर्गफीट के हिसाब से होती है, जहां इसकी कीमत 100 से 150 रुपये प्रति वर्ग फीट तक मिलती है। क्विंटल में खरीद कर वर्गफीट में बेचने के इस खेल से तस्करों को कई गुना का अंधा मुनाफा होता है। मजबूत इमारती कार्यों और कत्था निर्माण में भारी उपयोगिता के कारण ही इस बेशकीमती लकड़ी की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है और यही वजह है कि तस्करों का नेटवर्क तमाम पाबंदियों के बावजूद चोरी-छिपे इसके अवैध कारोबार में लगातार अपनी जड़ें फैलाने का प्रयास करता रहता है, जिसे नेस्तनाबूद करने के लिए वन विभाग अब पूरी तरह कमर कस चुका है।

Harsh Vardhan
Author: Harsh Vardhan

7 years experience in the field of journalism.

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