सोनभद्र में डस्ट प्रदूषण पर सख्त हुए डीएम, डाला, ओबरा और अनपरा में प्रतिदिन दो पालियों में एंटी-स्मोक गन से होगा जल छिड़काव

SHARE:

सोनभद्र। जनपद में लगातार बढ़ते धूल (डस्ट) प्रदूषण और इससे आमजन को हो रही दिक्कतों को लेकर जिलाधिकारी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को फील्ड में उतरकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से औद्योगिक और खनन गतिविधियों से अत्यधिक प्रभावित रहने वाले क्षेत्रों जैसे नगर पंचायत डाला, ओबरा और अनपरा के धूल प्रभावित इलाकों में प्रतिदिन अनिवार्य रूप से एंटी-स्मोक गन के माध्यम से पानी का बड़े पैमाने पर छिड़काव कराने का आदेश जारी किया है। जिलाधिकारी ने समय-सारणी निर्धारित करते हुए निर्देशित किया कि यह विशेष जल छिड़काव अभियान प्रतिदिन दो पालियों में यानी सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक और फिर शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक लगातार संचालित किया जाए, ताकि सड़कों और हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को दबाया जा सके और स्थानीय नागरिकों को प्रदूषण से तत्काल राहत मिल सके।

बैठक में कड़े तेवर दिखाते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगाना शासन की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इस कार्य में किसी भी स्तर पर थोड़ी सी भी लापरवाही या शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, नगर निकायों और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को हिदायत दी कि मुख्य सड़कों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए न केवल स्मोक गन बल्कि टैंकरों के माध्यम से भी नियमित जलापूर्ति और साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, विकास और निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों को डस्ट कंट्रोल के मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे नगर पंचायतों द्वारा किए जा रहे इस छिड़काव कार्य की रोजाना खुद मॉनिटरिंग (निगरानी) करें और इसकी एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं।

सोनभद्र की भौगोलिक और औद्योगिक संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को निर्देशित किया कि वे जनपद में संचालित बड़ी निजी व सरकारी कंपनियों, खदानों और क्रशर प्लांटों का लगातार औचक निरीक्षण करें। यदि कोई भी प्लांट या औद्योगिक इकाई तय मानकों का उल्लंघन करते हुए अत्यधिक प्रदूषण फैलाती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ प्लांट को सीज करने जैसी कठोर विधिक कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाए। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाले फ्लाई ऐश के निस्तारण पर भी चर्चा हुई। डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि यदि किसी भी मुख्य सड़क, संपर्क मार्ग या रिहायशी इलाके के किनारे फ्लाई ऐश अनाधिकृत और अवैध रूप से फेंकी हुई पाई जाती है, तो संबंधित ट्रांसपोर्टर और कंपनी के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण की यह जंग तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक सभी विभाग एक टीम की तरह काम न करें। उन्होंने सभी प्रशासनिक और तकनीकी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर पूरी मुस्तैदी से काम करने की बात कही ताकि जनपदवासियों को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वागीश कुमार शुक्ला, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी आर. के. सिंह सहित जिला स्तरीय और नगर पंचायतों के तमाम संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्हें अपनी-अपनी कार्ययोजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी दी गई है।

Harsh Vardhan
Author: Harsh Vardhan

7 years experience in the field of journalism.

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई

Follow Us Now